
रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी रायपुर पहुंचे। यहां आगमन के बाद उन्होंने प्रदेश की दो महान विभूतियों वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल और पंडवानी गायिका तीजन बाई के परिजनों से फोन पर बात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
पीएम मोदी ने विनोद कुमार शुक्ल के परिजनों से की बात
Vinod Kumar Shukla: प्रधानमंत्री मोदी को रायपुर पहुंचने पर जानकारी मिली कि वरिष्ठ लेखक विनोद कुमार शुक्ल अस्वस्थ हैं। इसके बाद उन्होंने स्वयं उनके परिजनों को फोन कर हालचाल जाना। विनोद कुमार शुक्ल के बेटे ने बताया कि प्रधानमंत्री ने बहुत आत्मीयता से उनके पिता के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह बातचीत परिवार के लिए भावनात्मक क्षण था, क्योंकि देश के प्रधानमंत्री ने स्वयं चिंता जताई।
पंडवानी गायिका तीजन बाई के परिवार से भी की बातचीत
Teejan Bai: प्रधानमंत्री मोदी ने पद्म भूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई के परिजनों से भी फोन पर संवाद किया। उन्होंने तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इसके बाद दुर्ग कलेक्टर को निर्देश दिए गए कि वे व्यक्तिगत रूप से उनके घर जाकर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करें।
हिंदी साहित्य के शिखर रचनाकार हैं विनोद कुमार शुक्ल
Literary Contribution: विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के सबसे सम्मानित लेखकों में गिने जाते हैं। हाल ही में उन्हें 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है। उनकी रचनाओं में सरलता और गहराई का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।
उनकी प्रमुख कृतियों में नौकर की कमीज़, दीवार में एक खिड़की रहती थी, खिलेगा तो देखेंगे और कभी के बाद अभी शामिल हैं। उन्होंने हिंदी उपन्यास और कविता को नई दिशा दी है।
पंडवानी को वैश्विक मंच तक पहुंचाने वाली तीजन बाई
Folk Legend: छत्तीसगढ़ की लोकगायिका तीजन बाई ने पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्हें पद्म श्री (1987), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और फुकुओका एशियाई सांस्कृतिक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का संदेश
Symbol of Respect: राज्योत्सव के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राज्य की इन दो प्रतिष्ठित विभूतियों के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है। यह संवाद न केवल प्रदेशवासियों के लिए गर्व का क्षण है बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का संदेश देता है।
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