
रायपुर: Nun Arrest Case Update: छत्तीसगढ़ में ननों की गिरफ्तारी को लेकर मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोपों में पकड़ी गईं दो ननों को लोअर कोर्ट के बाद अब सेशन कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी कि यह केस उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अब पूरा मामला बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट में सुना जाएगा।

सेशन कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
सेशन कोर्ट के जज अनीश दुबे (FTSC) ने साफ कहा कि मानव तस्करी से जुड़ा मामला होने के कारण यह प्रकरण NIA के दायरे में आता है। ऐसे में सुनवाई केवल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ही कर सकती है। अब पीड़िता के वकील राजकुमार तिवारी ने बिलासपुर की NIA कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। तब तक दोनों ननों को जेल में ही रहना होगा।
अब राजनीति गरमाई, दिल्ली से रायपुर तक पहुंची गूंज
ननों की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर पहुंचकर जेल में बंद ननों से मुलाकात की। इसमें CPI(M) की पूर्व राज्यसभा सांसद बृंदा करात, के. राधाकृष्णन, जोस के. मनी, ए.ए. रहीम, पी.पी. सुनीर और एनी राजा जैसे नाम शामिल रहे।

जेल मुलाकात के बाद प्रेस क्लब में हुई प्रेसवार्ता में बृंदा करात ने तीखे सवाल उठाए। उन्होंने पूरे मामले को “अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला” बताया और कहा कि इस केस को एजेंडे के तहत गढ़ा गया है।
बजरंग दल पर गंभीर आरोप, FIR रद्द करने की मांग
बृंदा करात का कहना था कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आदिवासी लड़कियों से मारपीट की और जबरन कहलवाया कि वे अपनी मर्जी से नहीं जा रही थीं। उन्होंने ये भी कहा कि ननों को पुलिस के सामने अपशब्द कहे गए और उनका अपमान हुआ।
करात ने FIR को फर्जी बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की। साथ ही ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों और हमला करने वालों पर कार्रवाई की मांग भी रखी।
“छत्तीसगढ़ में संविधान बंद नहीं होगा”: बृंदा करात का तंज
बजरंग दल द्वारा बुलाए गए ‘छत्तीसगढ़ बंद’ पर बृंदा करात ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा,
“आप कहीं भी बंद कर लीजिए, लेकिन संविधान को बंद नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ बंद हो सकता है, संविधान बंद नहीं होगा।”
केरल कनेक्शन और स्वास्थ्य की चिंता
करात ने बताया कि गिरफ्तार ननें केरल की निवासी हैं और भारत की नागरिक हैं। उन्होंने सालों से सामाजिक सेवा में योगदान दिया है। फिलहाल उनकी तबीयत खराब बताई जा रही है। इस मुद्दे पर केरल के मुख्यमंत्री ने भी प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर दखल की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
25 जुलाई की रात, दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दो ननों और एक युवक को रोका। आरोप था कि ये तीन लोग नारायणपुर की तीन आदिवासी लड़कियों को बहला-फुसलाकर आगरा ले जा रहे थे। आरोप लगते ही स्टेशन पर नारेबाजी शुरू हो गई। बाद में सभी को GRP के हवाले कर दिया गया।
GRP थाना भिलाई-3 के अंतर्गत आने वाली चौकी ने मामले की जांच के बाद धर्मांतरण की धारा 4 के तहत केस दर्ज कर सभी को न्यायिक रिमांड में भेज दिया। यहीं से मामला तूल पकड़ गया।
पूरा मामला अब NIA कोर्ट के पाले में चला गया है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है – केस कमजोर पड़ता है या और मजबूत होता है। एक बात तय है, यह मामला अब सिर्फ कानून का नहीं रहा, बल्कि सियासत की ज़मीन पर भी उतर चुका है।



