
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। प्रदेश दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार पर नक्सलियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया और पलटवार करते हुए पुराने बयानों का हवाला दिया।
अमित शाह का भूपेश सरकार पर सीधा आरोप
8 फरवरी को रायपुर में आयोजित ऑर्गनाइजर के कॉनक्लेव में अमित शाह ने कहा कि वे भूपेश बघेल के कार्यकाल में भी केंद्रीय गृह मंत्री थे। उन्होंने कहा कि पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कहना चाहते हैं कि उस समय माओवादी गतिविधियों को बढ़ावा मिला। शाह ने सवाल उठाया कि कोई भी सरकार हथियारबंद समूहों को संरक्षण कैसे दे सकती है।
कांग्रेस ने बताया बयान को तथ्यहीन
अमित शाह के आरोपों पर कांग्रेस ने कहा कि यह बयान सच्चाई से परे है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक कारणों से गलत बातें कही जा रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि उनके शासनकाल में नक्सली घटनाओं में लगातार गिरावट दर्ज की गई थी।
चार साल पुराने बयानों की याद दिलाई
कांग्रेस ने कहा कि चार साल पहले खुद अमित शाह ने भूपेश सरकार के कामकाज की सराहना की थी। पार्टी ने याद दिलाया कि उस समय नक्सलवाद को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों की बात कही गई थी। कांग्रेस का कहना है कि आज के आरोप उन्हीं बयानों से उलट हैं।
2021 के छत्तीसगढ़ दौरे का हवाला
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि 5 अप्रैल 2021 को छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान अमित शाह ने मीडिया से कहा था कि नक्सली घटनाओं में करीब 80 प्रतिशत तक कमी आई है। उस समय राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नक्सल गतिविधियों के कमजोर पड़ने की बात कही थी।
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़े
कांग्रेस ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के लोकसभा में दिए बयान का भी जिक्र किया। इस बयान में कहा गया था कि 2018 की तुलना में 2022 में छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा की घटनाओं में 36 प्रतिशत की कमी आई है। उग्रवाद से जुड़ी हिंसा और मौतों के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी।
कांग्रेस का दावा, विकास से कमजोर पड़ा नक्सल नेटवर्क
कांग्रेस का कहना है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में विश्वास, विकास और सुरक्षा के मॉडल पर काम हुआ। नक्सल प्रभावित इलाकों में नए सुरक्षा कैंप बनाए गए। सड़कों और पुलों का निर्माण हुआ और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में संपर्क बेहतर किया गया। पार्टी का दावा है कि इन प्रयासों से नक्सली गतिविधियां सीमित इलाकों तक सिमट गई थीं।
राजनीतिक आरोपों पर उठे सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वर्तमान में पहले किए गए प्रयासों को नजरअंदाज कर राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि नक्सलवाद पर नियंत्रण में पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों की अहम भूमिका रही है और इसे नकारा नहीं जा सकता।
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