
रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा है कि विभाग में शिक्षकों के पदों का युक्तियुक्तकरण (Rationalization) किया जाएगा। इसका मतलब है कि जहाँ शिक्षकों की संख्या छात्रों के मुकाबले बहुत ज्यादा है, वहाँ से उन्हें उन कॉलेजों में भेजा जाएगा जहाँ शिक्षकों की कमी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूरे राज्य में शिक्षक-छात्र अनुपात को संतुलित करना है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
शिक्षा विभाग का विस्तार और नए पदों पर भर्ती
राज्य में युवाओं को बेहतर शिक्षा के अवसर देने के लिए सत्र 2022-23 में 6 नए सरकारी और 25 नए प्राइवेट कॉलेज शुरू किए गए थे। इस विस्तार के बाद, छत्तीसगढ़ में अब कुल 9 सरकारी विश्वविद्यालय और 335 सरकारी कॉलेज हो गए हैं, जहाँ 3,35,139 छात्र पढ़ रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विभाग ने हाल ही में 1,167 सहायक प्राध्यापकों, 40 ग्रंथपालों और 39 क्रीड़ा अधिकारियों की भर्ती की है। इसके अलावा, 700 और नए पदों पर भर्ती की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके।
नई शिक्षा नीति और गुणवत्ता पर जोर
राज्य सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भी कई बदलाव कर रही है। 8 सरकारी कॉलेजों में सेमेस्टर प्रणाली के साथ चार साल का स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जिसमें ‘च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम’ भी शामिल है। इसके अलावा, इस सत्र से 10 सरकारी कॉलेजों में स्नातक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई की सुविधा भी दी गई है। शिक्षा की गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक 211 सरकारी कॉलेजों में से 175 और 244 प्राइवेट कॉलेजों में से 27 का नैक मूल्यांकन (NAAC Accreditation) पूरा हो चुका है। बाकी कॉलेजों का मूल्यांकन भी चल रहा है।



