छत्तीसगढ़

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती वर्ष पर दिया प्रबोधन, छत्तीसगढ़ की परंपराओं और आदर्शों की तारीफ की, बोली- ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’

रायपुर, 24 मार्च 2025। छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधायकों को संबोधित किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने न केवल छत्तीसगढ़ की परंपराओं की सराहना की, बल्कि राज्य के विकास, एकता और विधानसभा की नियमों की भी सराहना की।

छत्तीसगढ़ की परंपराओं और विधानसभा की सराहना

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ की धरती से जुड़ी कड़ी और मजबूत परंपराओं की तारीफ करते हुए की। उन्होंने कहा कि परिसीमन के मामले में प्रशासनिक सीमाएं होती हैं, लेकिन दिलों का जुड़ाव किसी सीमा को नहीं जानता। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग अतिथि देवो भव: की भावना से भरपूर होते हैं, और इसी कारण उन्हें बार-बार इस प्रदेश में आने का मन करता है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जैसे ओडिशा के लोग रायपुर को अपना मानते हैं, वैसे ही वे भी रायपुर को ओडिशा का ही हिस्सा मानती हैं।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के नियमों की तारीफ

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नियमों और परंपराओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में जो नियम बनाए गए हैं, वे खुद में एक मिसाल हैं, और इनका पालन करना हर विधायक की जिम्मेदारी है। उन्होंने विधानसभा के नियमों के पालन पर संतोष व्यक्त किया और इस बात पर खुशी जाहिर की कि आज तक विधानसभा में मार्शल का उपयोग नहीं करना पड़ा। राष्ट्रपति ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ विधानसभा की गरिमा और आदर्श का प्रतीक है।

महिलाओं को सशक्त बनाने की अपील

राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ की महिला विधायकों से एक विशेष अपील की। उन्होंने कहा, “महिलाएं जब एक-दूसरे को सशक्त बनाती हैं, तब समाज भी मजबूत होता है।” इसके साथ ही राष्ट्रपति ने मीनीमाता के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि प्रदेश की महिलाएं जनता का विशेष समर्थन प्राप्त करती हैं, जो उन्हें अपने अधिकारों और समाज में अपने स्थान के लिए प्रेरित करता है।

छत्तीसगढ़ में विकास की असीम संभावनाएं

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के विकास की असीम संभावनाओं की बात की। उन्होंने बताया कि अब तक छत्तीसगढ़ विधानसभा में 568 विधेयक पारित किए जा चुके हैं, जो राज्य के समग्र विकास में सहायक साबित हुए हैं। उन्होंने प्रदेश की नदियों—इंद्रावती, शिवनाथ और महानदी—का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नदियों का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ को प्राप्त है, और इन जलस्रोतों के कारण यहां विकास की अनगिनत संभावनाएं हैं।

वहीं, वामपंथी उग्रवाद के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह समस्या अब निर्णायक दौर में है और छत्तीसगढ़ जल्द ही इसे पूरी तरह नियंत्रित कर सकेगा।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के ऐतिहासिक संबंध

राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “परिसीमन की सीमाएं होती हैं, लेकिन दिलों के बीच कोई दीवार नहीं होती। ओडिशा के लोग भी छत्तीसगढ़ को अपना मानते हैं और हम भी रायपुर को ओडिशा का हिस्सा मानते हैं।” उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ के लोगों की मेहमाननवाजी की भी तारीफ की और कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” एक सटीक कहावत है, जो यहां के लोगों की विशेषता को दर्शाती है।

राष्ट्रपति का रायपुर से ओडिशा के लिए प्रस्थान

विधानसभा के विशेष सत्र में संबोधन देने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रायपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुईं, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और अन्य नेताओं ने उन्हें विदाई दी। इसके बाद राष्ट्रपति ओडिशा के लिए रवाना हो गईं, लेकिन उनके इस दौरे का प्रभाव और उनके शब्द छत्तीसगढ़ के लोगों के दिलों में लंबे समय तक गूंजते रहेंगे।

राष्ट्रपति का यह दौरा छत्तीसगढ़ की राजनीति और समाज में एक महत्वपूर्ण पल के रूप में दर्ज होगा।

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