
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी का मामला प्रमुखता से उठा। कांग्रेस विधायक इंद्र कुमार साहू के एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार किया कि राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्राध्यापकों (प्रोफेसर) और सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में कुल 481 महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं, जिसका सीधा असर भावी डॉक्टरों की पढ़ाई और अस्पतालों में विशेषज्ञ परामर्श पर पड़ रहा है।
प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों का गणित
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, सहायक प्राध्यापकों के लिए कुल 673 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 361 पद अभी भी खाली हैं। इसी तरह, प्राध्यापकों के 224 स्वीकृत पदों में से 120 पर कोई नियुक्ति नहीं हुई है। इसका मतलब है कि विशेषज्ञ स्तर के आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं। विधायक ने इन खाली पदों की महाविद्यालयवार और विषयवार सूची भी मांगी थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन विभागों में शिक्षकों की कमी सबसे ज्यादा है और किन कॉलेजों की स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक है।

10 सालों में भर्ती और प्रोबेशन की जमीनी हकीकत
सदन में साल 2015 से 2025 के बीच लोक सेवा आयोग (PSC) के जरिए हुई भर्तियों का ब्योरा भी मांगा गया। विधायक ने पूछा था कि इस दशक में कितने सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई और उनमें से कितनों ने अपनी परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। मंत्री ने बताया कि इस लंबी अवधि के दौरान भर्ती किए गए डॉक्टरों में से केवल 155 चिकित्सा विशेषज्ञों ने ही अपनी परिवीक्षा अवधि पूरी की है। यह आंकड़ा बताता है कि मेडिकल कॉलेजों में स्थायी फैकल्टी को बनाए रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की गुणवत्ता पर संकट
मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की इतनी बड़ी तादाद में कमी न केवल नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों पर सवाल उठाती है, बल्कि इससे कॉलेजों की मान्यता पर भी खतरा मंडराता रहता है। सहायक प्राध्यापकों की कमी के कारण रेजिडेंट डॉक्टरों और एमबीबीएस छात्रों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में आने वाले मरीजों को विशेषज्ञों की कमी की वजह से लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन रिक्तियों को भरने के लिए क्या ठोस और त्वरित कदम उठाता है।
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