
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मौजूद गंगरेल बांध का बैकवाटर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। अब जिला प्रशासन ने उन कम चर्चित इलाकों को विकसित करने का मन बनाया है जो अब तक पर्यटकों की नजरों से दूर थे। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने खुद नाव के जरिए इन दुर्गम क्षेत्रों का दौरा किया। उनका मकसद इन छिपे हुए पर्यटन स्थलों को मुख्यधारा से जोड़ना है ताकि धमतरी की एक अलग पहचान बन सके और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए साधन मिल सकें।
नाव से तय किया सफर और परखीं संभावनाएं
कलेक्टर ने निरीक्षण के लिए नाव का सहारा लिया और बांध के डुबान क्षेत्र में स्थित गांवों तक पहुंचे। इन इलाकों में सड़क मार्ग से पहुंचना काफी कठिन है, इसलिए उन्होंने जल मार्ग के जरिए वहां की भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक महत्व को समझा। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन जगहों पर कुदरती सुंदरता बिखरी हुई है, वहां बुनियादी सुविधाएं जुटाई जाएं। इसके लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाकर काम शुरू करने की हिदायत दी गई है।
सटियारा गांव में गांधी मंदिर का होगा कायाकल्प
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सटियारा गांव पहुंचे, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की याद में बना एक पुराना मंदिर स्थित है। उन्होंने इस ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े स्थल के संरक्षण पर जोर दिया। कलेक्टर ने मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क, सामुदायिक भवन और बिजली की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि इस मंदिर को ग्रामीण पर्यटन के एक मॉडल के तौर पर पेश किया जा सकता है।
‘मछुआरा गांव’ के रूप में पहचान बनाएगा तुमराबाहरा
धमतरी का तुमराबाहरा गांव अपनी विशेष जीवनशैली के लिए जाना जाता है क्योंकि यहां की पूरी आबादी मछली पालन और उसके व्यापार पर निर्भर है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इस गांव को ‘मछुआरा गांव’ की थीम पर विकसित किया जाए। पर्यटकों के लिए यहां मछुआरों के पारंपरिक औजार, नौकायन के तरीके और स्थानीय व्यंजनों का अनुभव लेने की व्यवस्था की जाएगी। इससे न केवल स्थानीय संस्कृति का संरक्षण होगा बल्कि ग्रामीणों की कमाई के जरिए भी बढ़ेंगे।
राम वन गमन पथ से जुड़ी राम टेकरी का निरीक्षण
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने राम टेकरी का भी जायजा लिया। यह स्थल राम वन गमन पथ का हिस्सा है और यहां प्राचीन शिलाचित्रों के अवशेष मिलते हैं। इन धरोहरों को सहेजने के लिए सुरक्षा घेरा बनाने और पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था करने की योजना है। प्रशासन चाहता है कि यहां आने वाले लोग प्राचीन इतिहास और आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक शांति का भी अनुभव कर सकें।
पर्यटकों के लिए होम-स्टे और मूलभूत सुविधाओं पर जोर
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ जगहों का सुंदर होना काफी नहीं है, बल्कि वहां रुकने और खाने-पीने का इंतजाम भी जरूरी है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों में होम-स्टे की सुविधा विकसित की जाए ताकि पर्यटक ग्रामीणों के घरों में रुक सकें। इसके अलावा पेयजल, साइन बोर्ड और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और स्थानीय स्तर पर व्यापार पनपेगा।
विकास के लिए तैयार होगी विस्तृत डीपीआर
गंगरेल बांध क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन विकास की एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर जल्द से जल्द राज्य सरकार को भेजी जाए। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनपद पंचायत के अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन का लक्ष्य है कि धमतरी के इन सुदूर अंचलों को चरणबद्ध तरीके से विकसित कर छत्तीसगढ़ का प्रमुख टूरिस्ट हब बनाया जाए।
स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने का संकल्प
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने साफ किया कि पर्यटन विकास का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय ग्रामीणों को मिलना चाहिए। जब पर्यटक इन गांवों में आएंगे, तो वहां की हस्तशिल्प, खान-पान और गाइड के रूप में युवाओं को काम मिलेगा। पर्यटन के जरिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करना ही इस पूरी कवायद का असली उद्देश्य है। प्रशासन की इस सक्रियता से धमतरी के सुदूर गांवों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है।



