Ration Scam in CG: छत्तीसगढ़ में सरकारी राशन दुकान में हितग्राहियों से पूछा जा रहा कि चावल चाहिए या पैसा, चल रहा खुलेआम कालाबाजारी

Ration Scam in CG: छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में सरकारी उचित मूल्य की दुकान में चावल बांटने और खरीदने का काला धंधा चल रहा है छत्तीसगढ़ के राशन लेने वाले लाभार्थियों को एक साथ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चावल उत्सव के तहत 3 महीने का राशन दिया जा रहा है, विक्रेता ही ग्राहकों से सीधे सरकारी राशन दुकान में लाभार्थियों से पूछ रहे हैं कि चावल लेकर जाओगे या पैसा चाहिए।

सरकारी उचित मूल्य की दुकान में विक्रेता राशन लेने वाले लाभार्थियों से 20 से 22 रुपए प्रति किलो के दर से चावल खरीद रहे हैं यह मामला रामसागर पारा पुरानी बस्ती टिकरापारा चांगोरापारा जैसे इलाकों के दुकान में खुलेआम चल रहा है।
मिली शिकायत के अनुसार पड़ताल करने पर पता चला कि सरकारी उचित मूल्य की दुकान में खुलेआम कार्ड धारकों से लेनदेन कर रहे हैं उनके साथ ही राशन खराब होने के नाम पर बाहर बेचने पर कार्ड धारकों पर होने वाली कार्यवाही का डर दिखाया कर खुद ही चावल खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

मार्केट में 32 से ₹35 में चावल का हो रहा कालाबाजारी

शासन के मुताबिक कोई भी विक्रेता किसी भी राशन लेने वाले लाभार्थियों से चावल नहीं खरीद सकता ना ही सरकार द्वारा दिए जाने वाले राशन को कोई भी लाभार्थी किसी को भी अपना राशन नहीं बेच सकता उसे केवल खाने के लिए ही उपयोग करना होगा अंत्योदय निः शक्तजन व बीपीएल श्रेणी के राशन कार्ड धारी को मुफ्त में चावल दिया जाता है। जिसे वह मार्केट में ₹22 किलो तक में बेच देता है और इसी राशन की खुले बाजार या मंडी में 32 से ₹35 में खरीद फरोक की कालाबाजारी की जाती है।

7 दिनों से कार्ड जमा कर सुबह दे रहे हैं टोकन

चावल उत्सव में मिलने वाले 3 महीने के एक साथ राशन के लिए सरकारी उचित मूल्य में काफी भीड़ चल रही है, कुछ दिन पहली ही गरियाबंद में 3 महीने का राशन लेने भगदड़ जैसी स्थिति देखने को मिला था। कई राशन दुकानों में एक सप्ताह से ज्यादा समय से कार्ड रखे हुए हैं और रोजाना लोग अपनी बोरी लेकर राशन की दुकानों में कतार में खड़े होकर अपना राशन लेने पहुंचते हैं इसके लिए दुकान संचालकों ने टोकन व्यवस्था की है सुबह ही लोगों को टोकन दे दिया जाता है टोकन में लिखे नंबर के अनुसार ही राशन दिया जाता है इस बीच में कोई भी कार्ड धारी बीच में आकर अपना कार्ड जमा नहीं कर सकता उन्हें अगले दिन टोकन लेने के लिए कहा जाता है। इस पर दूर दराज एवं बुजुर्ग लोग कई दिनों तक सरकारी उचित मूल्य के दुकान का चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।

जनता का सरकारी चावल बाजार की दुकानों में बिक रहा

सरकार गरीबों को राशन देने के लिए सरकारी राशन दुकान में चावल का वितरण करती है जिसे विक्रेताओं द्वारा खरीद कर कारोबारी जाता है और जब उन्ही लाभार्थियों को जब चावल की आवश्यकता होती है तो उन्हें यह चावल मार्केट में ₹35 से अधिक में बेचा जाता है।

सरकार के योजना का कारोबारी उठा रहे है लाभ

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनता को मिलने वाले सरकारी उचित मूल्य की दुकान से राशन का वितरण प्रत्येक माह किया जाता है जिसे मौसम एवं आने वाले तीन महीनों में बारिश के समय कार्ड धारकों को होने वाली समस्याओं को देखते हुए एकमुश्त 3 महीने का राशन एक साथ देने के निर्णय के मुताबिक छत्तीसगढ़ के सभी लाभार्थियों को एक साथ 3 महीने का राशन प्रदान किया जा रहा है जिसका लाभ कारोबारी उठा रहें है इस कालाबाजारी में विक्रेता स्वयं राशन दुकान में राशन लेने के लाइन में खड़े हुए कार्ड धारकों से पूछ रहे हैं कि क्या आप राशन ले जाएंगे या राशन के बदले पैसा, सरकार की योजनाओं का इस तरह खुलेआम कालाबाजारी होना नागरिक वितरण प्रणाली में एक प्रश्न खड़ा करता है।

इस धंधे को रोकने के लिए खाद्य विभाग एवं सरकारी उचित मूल्य के सेल्समेन को ऐसे विक्रेताओं पर लगाम लगानी चाहिए एवं प्रशासनिक कार्यवाही करनी चाहिए।

राशन बेच दोगुनी राशि में खरीदने मजबूर होंगे लाभार्थी

जिस तरह छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा एक साथ तीन महीने का राशन लाभार्थियों को दे रही है ज्यादातर लाभार्थी अपने राशन को विक्रेताओं को सोसाइटी से लाने के बाद तीन माह का राशन बेच दे रहे है लेकिन आने वाले दो महीना के अंदर उन्हें फिर से चावल को लेकर किल्लत महसूस होगी और फिर उन्हें विक्रेताओं के पास बेचे गए चावल को बाजार में जाकर दोगुनी दामों में खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा, इससे कार्ड धारक को अपने ही बेच हुए चावल को दोगुनी दामों में खरीद कर अपने परिवार का भरण पोषण के लिए उन्हें मजबूरन दोगुना दाम देना पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ में हो रहे राशन के खरीदी और बिक्री के इस कालाबाजारी पर सरकार को अंकुश लगाना चाहिए और खाद्य विभाग को इस पर समय रहते एक्शन लेने की आवश्यकता है जिससे ग्रामीण क्षेत्र या शहरी क्षेत्र में हो रहे सरकारी चावल के काले धंधे को रोक कर जरूरतमंदों और लाभार्थियों को इस तरह के लालच से बचाया जा सकता है एवं सरकार की योजना का सही तरीके से जमीन स्तर पर क्रियान्वयन भी देखा जा सकता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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