108 एंबुलेंस सेवा में खेल: वर्क ऑर्डर से पहले ही वसूली शुरू, युवाओं से ट्रेनिंग के नाम पर मांगे जा रहे हजारों रुपए

छत्तीसगढ़ में 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाली हैदराबाद की कंपनी ‘जीभीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज’ पर गंभीर आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि शासन की ओर से अभी कंपनी को काम शुरू करने का औपचारिक आदेश (वर्क ऑर्डर) भी नहीं मिला है, लेकिन कंपनी ने भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोप है कि नौकरी देने के बदले युवाओं से खुलेआम मोटी रकम की मांग की जा रही है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

अपलिंकिंग प्रोग्राम के बहाने जेब काटने की तैयारी

कंपनी ने भर्ती के लिए ‘अपलिंकिंग प्रोग्राम’ नाम का एक नया रास्ता निकाला है। इसके तहत इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) से 15 हजार रुपए और ड्राइवरों व ईआरओ से 7500 रुपए जमा करने को कहा जा रहा है। युवाओं का आरोप है कि कंपनी के प्रतिनिधि क्यूआर कोड भेजकर पैसे मांग रहे हैं। उन्हें डराया जा रहा है कि अगर यह राशि जमा नहीं की गई, तो उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी। बेरोजगारी के इस दौर में हजारों युवा मजबूरी में पैसे देने को तैयार हो रहे हैं।

अनुभवी कर्मचारियों पर भी ट्रेनिंग का दबाव

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को भी नहीं बख्श रही है। जो ड्राइवर और ईएमटी पिछले कई सालों से 108 एंबुलेंस में सेवाएं दे रहे हैं, उन पर भी दोबारा ट्रेनिंग और पैसे जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। पुराने कर्मचारियों का कहना है कि वे पहले से ही प्रशिक्षित हैं, ऐसे में उनसे पैसे वसूलना केवल कंपनी का अपना खजाना भरने का तरीका है। कंपनी ने साफ कह दिया है कि प्राथमिकता उन्हीं को मिलेगी जो पहले भुगतान करेंगे।

कम रेट पर टेंडर लेने की भरपाई युवाओं से

स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में चर्चा है कि कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए बहुत कम रेट पर बोली लगाई थी। अब अपनी लागत निकालने और मुनाफा कमाने के लिए कंपनी कर्मचारियों की जेब पर डाका डाल रही है। वर्तमान में इस सेवा का संचालन ‘जय अंबे एंबुलेंस सर्विसेज’ कर रही है और अगले कुछ महीनों में हैंडओवर होना है। लेकिन इस प्रक्रिया के पूरा होने से पहले ही करोड़ों रुपए की अवैध वसूली ने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

विभाग की सफाई: अभी नहीं मिला काम का आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए एंबुलेंस सेवा के प्रभारी अधिकारी डॉ. नेतराम बेक ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को अब तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुआ है। फिलहाल केवल पुरानी कंपनी से नई कंपनी को काम सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगर इस वसूली से जुड़े ठोस सबूत मिलते हैं, तो मामले को उच्च अधिकारियों के सामने रखा जाएगा। अब देखना होगा कि शासन इस खुली लूट पर कब तक लगाम लगाता है या युवा ऐसे ही ठगे जाते रहेंगे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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