बस्तर में लाल आतंक की कमर टूटी: अमित शाह के दौरे से पहले 51 नक्सलियों का सरेंडर, डेढ़ करोड़ का था इनाम

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से ठीक पहले बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुकमा और बीजापुर जिले में कुल 51 खूंखार नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। इन नक्सलियों पर शासन की ओर से कुल डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित था। गृह मंत्री शाह शनिवार रात रायपुर पहुंच रहे हैं, जहां वे नक्सलवाद की समीक्षा करेंगे। उनके आने से पहले इतनी बड़ी संख्या में कैडरों का मुख्यधारा में लौटना नक्सली नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए 31 मार्च 2026 की समय सीमा तय की है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बस्तर के जंगलों में एंटी-नक्सल ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं। चौतरफा दबाव और सुरक्षा बलों की बढ़ती सक्रियता के कारण अब नक्सली संगठन के भीतर बिखराव दिखने लगा है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि शासन की नई पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर नक्सली अब हथियार डालने को मजबूर हो रहे हैं।

सुकमा में 21 नक्सलियों ने जमा किए घातक हथियार

शनिवार को सुकमा जिले में 21 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के आला अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। इन नक्सलियों ने अपने साथ लाए गए एके-47, एसएलआर और बीजीएल लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंप दिए। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर करीब 76 लाख रुपये का इनाम था। ये सभी नक्सली बस्तर के अंदरूनी इलाकों में हुई कई बड़ी हिंसक वारदातों में शामिल रहे हैं।

बीजापुर में 30 कैडरों ने छोड़ी हिंसा की राह

बीजापुर जिले में भी शनिवार को 30 माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इनमें 20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं, जो दक्षिण सब जोनल ब्यूरो के सक्रिय सदस्य थे। इन सभी पर कुल 85 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान इन कैडरों ने भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, जिलेटिन स्टिक और वायर भी पुलिस को सौंपे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों के इस फैसले से संगठन का आधार पूरी तरह कमजोर हो गया है।

‘पूना मारगेम’ अभियान बना भरोसे की नई राह

बस्तर में नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए चलाया जा रहा ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान काफी सफल साबित हो रहा है। बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के मुताबिक, 1 जनवरी 2024 से अब तक अकेले बीजापुर जिले में 918 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह अभियान न केवल नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आर्थिक और सामाजिक मदद भी प्रदान कर रहा है।

तत्काल सहायता के रूप में मिली 50 हजार की राशि

पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक नक्सली को शासन की ओर से तत्काल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इसके अलावा उन्हें घर बनाने, खेती और स्वरोजगार के लिए भी आगे मदद दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन कैडरों के सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस सफलता में डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा बटालियन और जिला बल की संयुक्त टीम का विशेष योगदान रहा है।

सुरक्षा बलों की अपील: हिंसा छोड़ें और लौटें

बीजापुर पुलिस और बस्तर आईजी ने शेष नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और खोखली विचारधारा का रास्ता छोड़ दें। उन्होंने कहा कि शासन की नीतियां उन्हें एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जंगलों में भटकने और सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बजाय, समर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होना ही स्थायी समाधान है। अमित शाह के इस दौरे के बाद माना जा रहा है कि नक्सल विरोधी अभियानों में और भी ज्यादा तेजी आएगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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