Right to Disconnect Bill: ऑफिस के बाद कोई कॉल या ईमेल नहीं कर सकता बॉस: जानें क्या है संसद में पेश ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल’

नई दिल्ली: Right to Disconnect Bill: लगातार डिजिटल कनेक्टिविटी के इस युग में स्मार्टफोन ने ऑफिस और घर के बीच की सीमा को धुंधला दिया है। शाम 6 बजे के बाद भी देर रात के ईमेल और बॉस के जरूरी मैसेज अब रूटीन का हिस्सा बन चुके हैं। इसी बढ़ती हुई चिंता और कर्मचारियों पर हमेशा ऑनलाइन रहने के दबाव को देखते हुए हाल ही में लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने संसद में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025’ पेश किया है। यह बिल कर्मचारियों को काम के घंटे के बाद काम से अलग होने की कानूनी आजादी देकर उनके जीवन में संतुलन बहाल करने की कोशिश करता है।

क्या प्रस्ताव करता है ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल’?

यह बिल कर्मचारियों को ऑफिस के घंटे के बाहर काम से जुड़े संचार (कॉल या ईमेल) से बचने का अधिकार देने के लिए बनाया गया है। इस नियम के तहत यह सुनिश्चित होता है कि कर्मचारी काम के बाद स्विच ऑफ कर सके और मालिक उस सीमा का सम्मान करें। कर्मचारियों पर अब काम का दिन खत्म होने के बाद कॉल या ईमेल का जवाब देने या फिर काम पूरा करने का दबाव नहीं होगा। हालांकि, मालिक आपातकालीन स्थिति में घंटों के बाद भी संपर्क कर सकता है, लेकिन कर्मचारी जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई के खिलाफ सुरक्षा

इस बिल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह कर्मचारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। यदि कोई भी कर्मचारी काम के घंटों के बाद कॉल न उठाने या मैसेज का जवाब न देने का फैसला करता है, तो कंपनी कानूनी तौर पर उन्हें इसके लिए सजा नहीं दे सकती। यह प्रावधान कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करता है और उन्हें मानसिक शांति प्रदान करता है।

ओवरटाइम भुगतान का प्रावधान

बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों में जहां पर कर्मचारी अपनी मर्जी से ऑफिस के घंटों के बाद कॉल या मैसेज का जवाब देते हैं, तो बिल स्टैंडर्ड वेतन दर पर उन्हें ओवरटाइम भुगतान अनिवार्य करता है। काम के घंटे के बाद कम्युनिकेशन को वैकल्पिक बनाकर यह बिल स्वस्थ काम की आदतों को बढ़ावा देगा और इमोशनल थकान को कम करेगा।

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नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर लगेगा जुर्माना

नियमों का पालन ठीक से हो इस बात को पक्का करने के लिए यह बिल उन कंपनियों पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव देता है जो डिस्कनेक्ट होने के अधिकार की अनदेखी करती हैं। जो नियोक्ता या एंप्लॉयर इन गाइडलाइंस का उल्लंघन करेंगे, उन पर उनके कुल कर्मचारी वेतन के 1% के बराबर का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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