
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी एक बार फिर पोस्टर के जरिए सामने आ गई है। बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक में आयोजित ‘मनरेगा बचाव महासंग्राम’ पदयात्रा के दौरान लगाए गए बैनरों ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इन पोस्टरों में पार्टी के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीरें नदारद थीं। पार्टी के दो सबसे बड़े चेहरों की फोटो गायब होने को अनुशासनहीनता माना जा रहा है।
जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को कारण बताओ नोटिस जारी
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संगठन महामंत्री ने गंगोत्री को औपचारिक नोटिस भेजकर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। नोटिस में पूछा गया है कि आधिकारिक कार्यक्रम के प्रचार माध्यमों से शीर्ष नेतृत्व की फोटो क्यों हटाई गई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह कदम संगठन की एकजुटता दिखाने के बजाय आपसी फूट को उजागर कर रहा है।
दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ नियम कायदों का उल्लंघन
हैरानी की बात यह है कि जिस पदयात्रा के लिए ये विवादित पोस्टर लगाए गए थे, उसमें पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे। एआईसीसी सचिव विजय जांगिड़ और पूर्व मंत्री उमेश पटेल जैसे नेताओं की मौजूदगी के बावजूद प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की अनदेखी की गई। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, किसी भी बड़े आयोजन में पार्टी लाइन का पालन करना जरूरी होता है, लेकिन यहां स्थानीय स्तर पर मनमानी देखने को मिली।

6 महीने के कार्यकाल वाले नियम से बढ़ी बेचैनी
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने हाल ही में जिला अध्यक्षों की कार्यप्रणाली को लेकर एक सख्त नियम लागू किया है। इसके तहत सभी जिला अध्यक्षों को छह महीने के ट्रायल पीरियड पर रखा गया है। इस दौरान उनके काम, व्यवहार और अनुशासन का बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा। यदि परफॉर्मेंस खराब पाई गई तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। महेंद्र गंगोत्री को मिला यह नोटिस उनके कार्यकाल के भविष्य पर सवालिया निशान लगा सकता है।
अनुशासन पर पीसीसी की पैनी नजर
पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि गुटबाजी या संगठनात्मक ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर सदस्यता अभियान और स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रियता बढ़ाना चाहती है। ऐसे में प्रदेश स्तर के नेतृत्व की फोटो पोस्टर से गायब होना यह संकेत देता है कि निचले स्तर पर अभी भी तालमेल की भारी कमी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिलाध्यक्ष इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं।



