
धमतरी जिले के मगरलोड थाना क्षेत्र में पुलिस की भूमिका को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वार्ड क्रमांक 3 के पार्षद यादराम गायकवाड़ ने पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों को एक शिकायती पत्र भेजकर मगरलोड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्षद का आरोप है कि पुलिस ने एक बड़े शराब तस्करी के मामले में मुख्य आरोपी को पकड़ने के बावजूद उसे बिना किसी कानूनी औपचारिकता के छोड़ दिया। इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
700 से ज्यादा शराब की बोतलें बरामद, फिर भी आरोपी फरार
पूरा मामला बोरीसी शराब भट्टी के पास हुई एक छापेमारी से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने एक सफेद रंग की संदिग्ध गाड़ी से 706 नग अवैध शराब बरामद की थी। इस दौरान मौके से शराब भट्टी के मैनेजर ओमप्रकाश सिन्हा को भी हिरासत में लिया गया था। पार्षद के आवेदन के अनुसार, पुलिस रिकॉर्ड में अपराध क्रमांक 29/2026 दर्ज होने के बावजूद मैनेजर को गिरफ्तार नहीं किया गया। आरोप है कि जांच अधिकारी और थाना प्रभारी ने मिलीभगत कर आरोपी को थाने से ही जाने दिया, जो कानूनन एक गंभीर चूक है।
लेनदेन के आरोप और सीसीटीवी फुटेज की मांग
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाए हैं। पार्षद का दावा है कि इस पूरे मामले में भारी भरकम रकम का लेनदेन हुआ है जिसकी वजह से मुख्य आरोपी का नाम एफआईआर में होने के बाद भी उसे न्यायिक रिमांड पर नहीं भेजा गया। शिकायत में मांग की गई है कि थाने के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन की निष्पक्ष जांच की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस केवल मोहरों को पकड़ रही है जबकि असली खिलाड़ी अब भी आजाद हैं।
अवैध नशे के कारोबार पर पुलिस की चुप्पी
आवेदन में न केवल शराब तस्करी बल्कि क्षेत्र में फल-फूल रहे अवैध गांजा और नशीली दवाओं के कारोबार का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि क्षेत्र में सरेआम अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं और पुलिस को इसकी पूरी जानकारी है। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। पार्षद ने आईजी और एसपी से गुहार लगाई है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि खाकी की साख बनी रहे।



