
रायपुर: छत्तीसगढ़ में जमीन की गाइडलाइन दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी के खिलाफ आम जनता और विपक्षी कांग्रेस पार्टी की सख्त नाराजगी के बाद राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने गाइडलाइन दरों से संबंधित कई आदेशों को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। प्रदेश के अनेक जिलों में गाइडलाइन दर में 100 प्रतिशत और कई क्षेत्रों में तो 500 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई थी, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ था। इन आदेशों को वापस लेने से जनता को बढ़ी हुई जमीन की कीमतों से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
नगर क्षेत्र समेत बहु-मंजिला इमारतों से जुड़े प्रमुख आदेश रद्द
सरकार ने जिन प्रमुख आदेशों को वापस लिया है, उनमें तीन खास हैं। इनमें नगर क्षेत्र में 1400 वर्ग मीटर के इंक्रीमेंटल आधार वाला आदेश, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के सामने और पीछे के रेट को समान करने वाला आदेश, और बहु-मंजिला इमारत के सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य तय करने वाला आदेश शामिल हैं। ये सभी आदेश जमीन की खरीद-फरोख्त को सीधे प्रभावित कर रहे थे, जिससे रियल एस्टेट बाजार में सन्नाटा छा गया था।
मुख्यमंत्री ने दिया था राहत का आश्वासन, 31 दिसंबर तक मांगे सुझाव
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया था कि वर्ष 2017 के बाद गाइडलाइन दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ था, जबकि नियमानुसार हर साल समीक्षा आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने यह आश्वासन भी दिया था कि यदि नई दरों से जनता पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है, तो सरकार आम जनता को राहत देने के लिए इनकी समीक्षा करेगी। इसी कड़ी में सरकार ने आम जनता से 31 दिसंबर 2025 तक सुझाव अथवा शिकायतें जमा कराने के लिए कहा है।

सत्तारूढ़ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी पत्र लिखकर आगाह किया था
गाइडलाइन दर में भारी बढ़ोतरी को लेकर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष में भी आवाजें उठी थीं। सत्ता पक्ष के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आगाह किया था कि यदि गाइडलाइन दर वापस नहीं ली जाती हैं, तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक असर पड़ सकता है। दोनों तरफ से आए विरोध और आर्थिक असर की चिंताओं के बाद सरकार को यह तत्काल कदम उठाना पड़ा।
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