Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि से पहले पंचक का साया: इस दिन से शुरू होगा नक्षत्रों का फेर, जानें क्यों इन 5 दिनों में वर्जित होते हैं शुभ कार्य

हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होने जा रहा है। मां दुर्गा की भक्ति के इन नौ दिनों से ठीक पहले आकाश मंडल में नक्षत्रों की एक ऐसी स्थिति बन रही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में ‘पंचक’ कहा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से दोष लगता है और उनके परिणाम कष्टकारी हो सकते हैं। इस बार नवरात्रि के शुरुआती दो दिनों पर भी पंचक का आंशिक साया रहेगा, इसलिए कलश स्थापना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के समय को लेकर लोगों के मन में जिज्ञासा बनी हुई है।

16 मार्च से लगेगा राज पंचक: सोमवार से हो रही है शुरुआत

ज्योतिष गणना के अनुसार मार्च 2026 में पंचक काल 16 मार्च, सोमवार को शाम 6 बजकर 14 मिनट से प्रारंभ होगा। यह कालखंड 20 मार्च को देर रात 2 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगा। चूंकि इस बार पंचक की शुरुआत सोमवार से हो रही है, इसलिए इसे ज्योतिषीय भाषा में ‘राज पंचक’ कहा जाता है। शास्त्रों में राज पंचक को अन्य पंचकों की तुलना में कम हानिकारक माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है और संपत्ति से जुड़े लाभ हो सकते हैं, लेकिन फिर भी कुछ पारंपरिक निषेधों का पालन करना जरूरी होता है।

नक्षत्रों का पांच दिवसीय चक्र: क्यों माना जाता है इसे संवेदनशील?

जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तो उस समय को पंचक कहा जाता है। हिंदू धर्म में इसे सावधानी बरतने वाला समय माना गया है। ज्योतिषियों का कहना है कि इन नक्षत्रों के प्रभाव के कारण इस अवधि में किए गए किसी भी गलत कार्य का फल पांच गुना बढ़कर मिलता है। यही कारण है कि लोग इन पांच दिनों में जोखिम भरे काम करने से कतराते हैं और सात्विक जीवन शैली अपनाने पर जोर देते हैं।

इन कामों पर रहेगी पाबंदी: भूलकर भी न करें ये गलतियां

पंचक के दौरान पांच प्रमुख कार्यों को पूरी तरह वर्जित माना गया है। सबसे पहले, इस समय घर की छत डालना अशुभ होता है, माना जाता है कि ऐसी छत घर के सदस्यों के लिए संकट ला सकती है। दूसरा, लकड़ी का संचय करना या लकड़ी से जुड़ा फर्नीचर (जैसे पलंग या चारपाई) बनवाना भी मना है। इसके अलावा, दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि इस दिशा को यम की दिशा माना गया है। पंचक के दौरान किसी की मृत्यु होने पर भी विशेष शांति पूजन का विधान है ताकि परिवार पर आने वाले संकटों को टाला जा सके।

मांगलिक कार्यों के लिए करना होगा इंतजार: नवरात्रि पर क्या होगा असर?

शादी-ब्याह, मुंडन, गृह प्रवेश और सगाई जैसे मांगलिक कार्यों के लिए पंचक को शुभ नहीं माना जाता है। चूंकि 19 मार्च को नवरात्रि का पहला दिन है और पंचक 20 मार्च की रात तक चलेगा, इसलिए कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त को लेकर विद्वानों की सलाह लेना उचित होगा। आमतौर पर धार्मिक अनुष्ठानों और मां की पूजा पर पंचक का नकारात्मक असर नहीं पड़ता है, लेकिन निर्माण कार्यों और नई खरीदारी जैसे सांसारिक शुभ कार्यों के लिए पंचक खत्म होने का इंतजार करना ही बेहतर माना जाता है।

पंचक के प्रकार: सोमवार से शनिवार तक का अलग महत्व

ज्योतिष शास्त्र में पंचक के शुरू होने वाले दिन के आधार पर उसका स्वभाव तय होता है। सोमवार को शुरू होने वाला ‘राज पंचक’ सुख-सुविधाओं के लिए ठीक है, जबकि रविवार को ‘रोग पंचक’ और मंगलवार को ‘अग्नि पंचक’ लगता है। सबसे खतरनाक शनिवार से शुरू होने वाला ‘मृत्यु पंचक’ माना जाता है, जिसमें किसी भी नए काम की शुरुआत वर्जित होती है। इस बार राज पंचक होने के कारण आम जनजीवन पर इसका प्रभाव बहुत ज्यादा नकारात्मक नहीं रहेगा, लेकिन सतर्कता बरतना सदैव लाभकारी होता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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