
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक बेहद खास और प्रेरणादायक सामूहिक विवाह का आयोजन संपन्न हुआ। शहर के सरस्वती शिशु मंदिर में तीन दिव्यांग जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नई जिंदगी की शुरुआत की। इस विवाह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी थीम रही, जिसे ‘नशामुक्त समाज, नशामुक्त धमतरी’ नाम दिया गया। बारात निकलने से पहले घड़ी चौक से एक भव्य नशामुक्ति रैली निकाली गई, जिसे एसपी सूरज सिंह परिहार ने हरी झंडी दिखाई। इस दौरान एसपी ने न केवल दूल्हों और बारातियों को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई, बल्कि सुरक्षा का संदेश देते हुए तीनों दूल्हों को हेलमेट भी उपहार में दिए।

सात फेरे और आठवां वचन: दूल्हा-दुल्हन ने ली नशे से दूर रहने की शपथ
विवाह की रस्मों के दौरान दूल्हा और दुल्हनों ने समाज को एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने हिंदू धर्म के पारंपरिक सात वचनों के साथ-साथ ‘नशामुक्ति’ को अपने जीवन का आठवां वचन माना। नवविवाहित जोड़ों का कहना था कि नशा न केवल स्वास्थ्य को बर्बाद करता है और कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देता है, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों को भी उजाड़ देता है। इस आयोजन के माध्यम से उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए व्यसनों से दूर रहना अनिवार्य है। 27 दिसंबर को हल्दी-मेहंदी की रस्मों के बाद 28 दिसंबर को पूरे रीति-रिवाज के साथ यह विवाह संपन्न हुआ।
समाजसेवियों ने निभाया कन्यादान का फर्ज: इन जोड़ों की बसी गृहस्थी
इस सामूहिक विवाह में समाज के प्रतिष्ठित लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कन्यादान की रस्म पूरी की। किशन यादव और ललिता यादव, पूरनदास साहू और चंद्रमुखी साहू, तथा धीरेंद्र गजेंद्र और द्रोपती निषाद इस परिणय सूत्र में बंधे। समाजसेवी रितुराज पवार, नरेंद्र साहू और नीलेश सालुंके ने पिता का फर्ज निभाते हुए एक-एक जोड़े का कन्यादान किया। इन समाजसेवियों का कहना था कि शास्त्रों में कन्यादान को सबसे बड़ा दान माना गया है और दिव्यांग बेटियों का घर बसाने में सहयोग करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने अन्य संस्थाओं से भी ऐसे नेक कार्यों में आगे आने की अपील की।

एक्ज़ैक्ट फाउंडेशन की मुहिम: 4 सालों में 18 जोड़ों का कराया विवाह
इस पूरे आयोजन की सूत्रधार ‘एक्ज़ैक्ट फाउंडेशन’ संस्था रही है, जो पिछले 4 वर्षों से दिव्यांगों के पुनर्वास और उनके सामाजिक अधिकारों के लिए काम कर रही है। संस्था की अध्यक्ष लक्ष्मी सोनी और उनकी टीम का मानना है कि दिव्यांगों को अक्सर शादी के लिए आर्थिक तंगी और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसी बाधा को दूर करने के लिए संस्था अब तक कुल 18 दिव्यांग जोड़ों का विवाह संपन्न करा चुकी है। संस्था का उद्देश्य दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें यह अहसास कराना है कि वे अकेले नहीं हैं।



