
छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए स्मार्ट PDS लागू करने की घोषणा की है। इस प्रणाली के शुरू होने के बाद राशन कार्डधारी राज्य के किसी भी उचित मूल्य दुकान से केवल स्कैन करके अनाज ले सकेंगे। खाद्य और राजस्व विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि स्मार्ट PDS को अगले साल यानी 2026 से पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है।
राज्य में वितरण प्रणाली होगी और अधिक लचीली
स्मार्ट PDS लागू होने पर वितरण प्रणाली राज्य भर में एक जैसी और सरल हो जाएगी। कार्डधारी किसी एक दुकान पर निर्भर नहीं रहेंगे और अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दुकान से राशन प्राप्त कर सकेंगे। यह व्यवस्था वन नेशन वन राशन कार्ड की तर्ज पर तैयार की जा रही है, जिससे लोगों को ज्यादा सुविधा मिलेगी और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी।
स्मार्ट PDS की प्रमुख विशेषताएं
स्मार्ट PDS का उद्देश्य राशन कार्ड प्रबंधन, सप्लाई चेन और वितरण को एक केंद्रीकृत और ऑनलाइन व्यवस्था में बदलना है। गड़बड़ियों पर निगरानी रखने के लिए लाल, पीले और हरे अलर्ट सिस्टम की व्यवस्था की गई है। खाद्यान्न ले जाने वाले वाहनों को भी ट्रैक किया जा रहा है ताकि अनियमितताओं को तुरंत चिन्हित किया जा सके। वर्तमान में किराये के भवनों में चल रही छह हजार पांच सौ पचासी उचित मूल्य दुकानों के लिए नए दुकान और गोदाम भवन बनाने का बजट स्वीकृत किया गया है।
सिस्टम लागू होने पर मिलेगी अतिरिक्त पारदर्शिता
स्मार्ट PDS लागू होने के बाद कार्डधारी पूरे राज्य में कहीं से भी राशन ले सकेंगे। ऑनलाइन प्रणाली से रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों की निगरानी आसान होगी। शिकायतों को चिन्हित करने के लिए रंग आधारित अलर्ट सिस्टम उपयोग में लाया जाएगा। इस बदलाव के साथ सप्लाई चेन भी पूरी तरह डिजिटल होगी।
लाखों परिवारों को मिलेगा लाभ
सरकार ने बताया है कि अब तक लगभग 11 लाख नए परिवार पीडीएस में जोड़े गए हैं, जिससे कुल 82 लाख सदस्यों को फायदा हो रहा है। बस्तर संभाग के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कांकेर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले 42 हजार से अधिक परिवारों को चावल, चना, नमक, शक्कर और गुड़ मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। इन इलाकों में 18 नई उचित मूल्य दुकानों को मंजूरी दी गई है।
उज्ज्वला योजना और आपदा सहायता पर भी जानकारी
सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 38 लाख महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में भी नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसके अलावा पिछले दो वर्षों में आपदा प्रभावित लोगों को 321 करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। आपदा मित्र योजना के तहत तीन हजार युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
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