छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में सौम्या चौरसिया की हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर आज सुनवाई, चैतन्य बघेल की रिहाई से जगी उम्मीद

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही कानूनी पैंतरेबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। सौम्या काफी समय से जेल में बंद हैं और अब उन्होंने अपनी रिहाई के लिए अदालत से गुहार लगाई है। इस याचिका पर 7 जनवरी को सुनवाई होनी तय हुई है। इसके ठीक अगले दिन यानी 8 जनवरी को ईओडब्ल्यू के प्रोडक्शन वारंट पर भी चर्चा होगी। खास बात यह है कि इस पूरे घोटाले का मुख्य ट्रायल 13 जनवरी से शुरू होने वाला है, जिससे पहले यह सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है।

चैतन्य बघेल की जमानत ने बदली हवा: सौम्या कैंप को राहत की आस, अदालती रुख पर टिकी सबकी निगाहें

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को अदालत से जमानत मिली है। इस फैसले के बाद शराब घोटाले के अन्य आरोपियों के बीच एक सकारात्मक संकेत गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि एक ही मामले से जुड़े अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल रही है, तो इसका लाभ सौम्या चौरसिया को भी मिल सकता है। अदालत फिलहाल आरोपों की गंभीरता और अब तक हुई जांच की प्रगति का मिलान कर रही है। सौम्या के वकीलों का तर्क है कि जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और वे लंबी अवधि से हिरासत में हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।

3200 करोड़ का सिंडिकेट: ईडी का दावा- शराब नीति में हेरफेर कर राजस्व को पहुंचाया गया भारी नुकसान

प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को करीब 3200 करोड़ रुपये का बताया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान एक संगठित सिंडिकेट बनाया गया था जिसमें ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी, बड़े राजनेता और रसूखदार कारोबारी शामिल थे। ईडी का दावा है कि इस गिरोह ने मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगाया और अवैध रूप से धन अर्जित किया। इस मामले में तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर जैसे बड़े नाम भी जांच के घेरे में हैं।

फर्जी होलोग्राम और कमीशन का खेल: सत्ता के केंद्र में रहते हुए फैसलों को प्रभावित करने का आरोप

ईडी के मुताबिक, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए गए थे। जांच में सामने आया कि सिंडिकेट ने अवैध कमीशन की वसूली की, नकली होलोग्राम का इस्तेमाल कर शराब बेची और ‘ऑफ-द-बुक्स’ यानी बिना किसी सरकारी रिकॉर्ड के लेनदेन किया। सौम्या चौरसिया पर आरोप है कि वे मुख्यमंत्री सचिवालय में तैनात रहते हुए इस पूरे तंत्र की गतिविधियों से वाकिफ थीं। जांच एजेंसी का कहना है कि उन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल कर ऐसे फैसले करवाए जिससे इस सिंडिकेट को सीधा फायदा पहुंचे। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

सियासी गलियारों में चर्चा तेज: कांग्रेस ने बताया सत्य की जीत, भाजपा बोली- जमानत का मतलब बेगुनाही नहीं

सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका पर हो रही सुनवाई के राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। चैतन्य बघेल की जमानत पर कांग्रेस जहां इसे सरकार की ‘बदले की राजनीति’ की हार बता रही है, वहीं भाजपा का रुख कड़ा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जमानत मिलना एक कानूनी प्रक्रिया है और इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आरोपी बेगुनाह साबित हो गया है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। अगर सौम्या को राहत मिलती है, तो कांग्रेस इसे अपनी नैतिक जीत के रूप में पेश करेगी, जबकि जमानत खारिज होने पर सत्तापक्ष भ्रष्टाचार के दावों को और मजबूती से उठाएगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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