
धमतरी जिले के 8 केंद्रों पर आयोजित सीजीपीएससी (CGPSC) की परीक्षा रविवार को बेहद सख्त सुरक्षा घेरे में संपन्न हुई। परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों को तीन स्तर की सघन जांच से गुजरना पड़ा। प्रशासन ने व्यापमं की तर्ज पर इस बार कपड़ों के रंग से लेकर सामान तक के लिए कड़े नियम लागू किए थे। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के हाथ की घड़ी, कमर से बेल्ट, जूते और यहां तक कि कानों की बालियां भी उतरवा ली गईं। मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही किसी को अंदर जाने की अनुमति मिली। स्थिति यह थी कि अभ्यर्थियों को रुमाल और गाड़ियों की चाबियां भी बाहर छोड़नी पड़ीं।
ड्रेस कोड बना बाधा, कई अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित
इस बार परीक्षा में कपड़ों के रंगों को लेकर खास निर्देश दिए गए थे। काला, गहरा नीला, हरा, चॉकलेटी, बैंगनी और मैरून जैसे गहरे रंगों के कपड़े पहनकर आने पर पाबंदी थी। इसके बावजूद कई अभ्यर्थी इन्हीं रंगों के कपड़े पहनकर पहुंच गए। नियम का पालन कराने के लिए कई केंद्रों पर अभ्यर्थियों को अपने कपड़ों की जेबें कैंची से काटनी पड़ीं। कुछ महिला अभ्यर्थी कपड़े बदलने के लिए बाहर गईं, लेकिन वापस लौटने में हुई देरी के कारण उन्हें केंद्र के अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। सुबह 9:45 बजे के बाद पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को नियमों का हवाला देकर गेट से ही लौटा दिया गया।
पहचान पत्र और आधार अपडेट न होने पर हुई मशक्कत
दस्तावेजों की जांच के दौरान भी कई परीक्षार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई अभ्यर्थी प्रवेश पत्र के साथ मूल पहचान पत्र लाना भूल गए थे, तो वहीं कुछ के आधार कार्ड अपडेट नहीं थे। केंद्रों पर तैनात अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया था कि बिना वैध दस्तावेजों के प्रवेश संभव नहीं होगा। इसके कारण कई अभ्यर्थियों को केंद्र के बाहर अपने परिजनों को फोन कर दस्तावेज मंगवाते या ऑनलाइन आधार डाउनलोड करने के लिए भागदौड़ करते देखा गया।
छत्तीसगढ़ के खान-पान और संस्कृति पर पूछे गए रोचक सवाल
परीक्षा के प्रश्नपत्र में छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति, लोकगीत और व्यंजनों से जुड़े कई दिलचस्प सवाल पूछे गए थे। परीक्षार्थियों से पूछा गया कि ‘बिहई’ छत्तीसगढ़ में किसका प्रकार है और ‘घोटुल’ का सामूहिक मनोरंजन गीत कौन सा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के व्यंजनों पर आधारित सवाल में पूछा गया कि ‘खीर जैसा व्यंजन’ कौन सा है, जिसमें लिमड़, खुरमी और चौलेसर जैसे विकल्प दिए गए थे। भूगोल से जुड़े सवालों में ‘कोठली जल प्रपात’ की स्थिति और संबंधित नदी के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी।
दो पालियों में 1000 से ज्यादा परीक्षार्थी रहे अनुपस्थित
धमतरी जिले में पीएससी परीक्षा के लिए कुल 2864 अभ्यर्थियों ने अपना पंजीयन कराया था। हालांकि, कड़ाई और अन्य कारणों से दोनों पालियों को मिलाकर कुल 1089 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। पहली पाली में 530 और दूसरी पाली में 559 लोगों ने परीक्षा छोड़ दी। जिले के प्रमुख केंद्रों जैसे बीसीएस पीजी कॉलेज, शिव सिंह वर्मा स्कूल और सेजेस बठेना में अनुपस्थित रहने वालों की संख्या सबसे अधिक रही। शासकीय स्कूल रुद्री और हटकेशर जैसे केंद्रों पर भी 400 से ज्यादा परीक्षार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे।
प्रशासन की सख्ती पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
परीक्षा संपन्न होने के बाद केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ परीक्षार्थियों ने नकल रोकने के लिए की गई इस सख्ती की सराहना की, तो वहीं कुछ ने कपड़ों के रंग और गहनों को लेकर किए गए नियमों को व्यवहारिक तौर पर कठिन बताया। परीक्षार्थियों का कहना था कि पीएससी की तैयारी के मानसिक दबाव के बीच इस तरह की भौतिक जांच से एकाग्रता पर असर पड़ता है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।
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