
छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र की कार्यवाही आज भारी हंगामे के साथ शुरू हुई। सदन में रायपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल (मेकाहारा) में करोड़ों रुपये की मशीन खरीदी और उनके धूल फांकने का मुद्दा गरमाया रहा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने अपनी ही सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को आड़े हाथों लिया। चंद्राकर ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर ये मशीनें कहां हैं? उन्होंने सवाल दागा कि “मशीन हवा में है या पाताल में?” इस सवाल ने सदन का तापमान बढ़ा दिया और सत्ता पक्ष के बीच ही जबरदस्त बहस शुरू हो गई।
पिछली सरकार के सिर फोड़ा देरी का ठीकरा
अजय चंद्राकर के तीखे सवालों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया कि ये मशीनें वर्तमान सरकार के कार्यकाल की नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकार के समय खरीदी गई थीं। मंत्री ने बताया कि मशीनें कहीं गुम नहीं हुई हैं, बल्कि मेकाहारा अस्पताल परिसर में ही सुरक्षित रखी हुई हैं। उन्होंने मशीनों के चालू न होने की वजह बताते हुए कहा कि इस पूरी खरीदी प्रक्रिया की जांच चल रही है। जांच पूरी होने और तकनीकी पहलुओं को परखने के बाद ही इन्हें मरीजों के लिए शुरू किया जाएगा।
मेकाहारा का सेटअप और बिस्तरों का गणित
प्रश्नकाल के दौरान अस्पताल के बुनियादी ढांचे पर भी विस्तृत चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने सदन पटल पर आंकड़े रखते हुए बताया कि मेकाहारा में वर्तमान में 700 बिस्तर स्वीकृत हैं। इसके अतिरिक्त, कैंसर अस्पताल के लिए अलग से 100 बिस्तर मंजूर किए गए हैं। मंत्री का दावा है कि अस्पताल में स्वीकृत बिस्तरों के अनुसार सेटअप की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, अजय चंद्राकर ने रिक्त पदों और विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा उठाकर मंत्री के दावों को चुनौती दी। उन्होंने पूछा कि जब पद खाली हैं, तो स्वीकृत बिस्तर मरीजों के किस काम के?
विशेषज्ञों और मानव संसाधन की भारी कमी
अजय चंद्राकर ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मानव संसाधन की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जानना चाहा कि स्वीकृत सेटअप के मुकाबले कितने पद खाली हैं और विशेषज्ञों की कितनी आवश्यकता है। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि बेड की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ विशेषज्ञों और आवश्यक उपकरणों की पूर्ति क्यों नहीं की गई? उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के पास इस कमी को दूर करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा है, क्योंकि स्टाफ की कमी का सीधा असर गरीब मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है।
बदहाल व्यवस्था: धूल फांक रहे अस्पताल के उपकरण
बहस के दौरान अस्पताल के विभिन्न विभागों में स्थापित उपकरणों की वर्तमान स्थिति पर भी सवाल उठे। विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि कौन-कौन से विभाग में मशीनें बंद पड़ी हैं और उनके चालू न होने से जनता को कितना नुकसान हो रहा है। मेकाहारा जैसे बड़े संस्थान में मशीनों का बंद होना मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी मुसीबत है, जिन्हें निजी केंद्रों में जाकर भारी भरकम फीस चुकानी पड़ती है। स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही मशीनों के संचालन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे।
सुधार के दावों के बीच जनता की उम्मीदें
सदन में हुई इस तीखी नोकझोंक के बाद अब रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में सुधार की उम्मीदें जगी हैं। अजय चंद्राकर के कड़े रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वह मशीनों की जांच जल्द पूरी कर उन्हें शुरू करे। मरीजों को बेहतर इलाज और कम प्रतीक्षा समय उपलब्ध कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब देखना होगा कि विधानसभा में उठे इन सवालों के बाद मेकाहारा की बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग क्या ठोस कदम उठाता है।



