
CG D.Ed Candidates Protest: छत्तीसगढ़ में 2300 चयनित डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन अब एक बेहद पीड़ादायक मोड़ पर पहुंच गया है। अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 98 दिनों से तूता धरना स्थल पर डटे युवाओं ने आज सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए खुद को शारीरिक यातनाएं दीं। कड़कड़ाती धूप और पथरीली जमीन पर अभ्यर्थी घुटनों के बल रेंगते हुए आगे बढ़े। इस प्रदर्शन के दौरान कई युवाओं के घुटने छिल गए और पैरों में खून के फफोले पड़ गए। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब हताश अभ्यर्थियों ने पास के तालाब में जल समाधि लेने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए 10 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
लहूलुहान घुटने और फफोले: न्याय के लिए सड़क पर रेंगने को मजबूर युवा
आंदोलन के 98वें दिन अभ्यर्थियों ने विरोध का ऐसा तरीका चुना जिसे देखकर हर कोई सिहर उठा। चयनित शिक्षक अभ्यर्थी धरना स्थल से घुटनों के बल चलकर अपनी नियुक्ति की गुहार लगाने निकले। तपती सड़क पर रेंगने के कारण कई अभ्यर्थियों के कपड़े फट गए और उनके घुटनों से खून बहने लगा। इसके बावजूद युवाओं का जज्बा कम नहीं हुआ। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले तीन महीने से शांतिपूर्ण विनती कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की बेरुखी ने उन्हें इस हाल में पहुंचा दिया है।
जल समाधि का प्रयास: तालाब में उतरे अभ्यर्थी तो मच गया हड़कंप
प्रदर्शन के दौरान अचानक कुछ अभ्यर्थी तूता धरना स्थल के पीछे स्थित तालाब की ओर दौड़ पड़े और पानी में उतरकर जल समाधि लेने का प्रयास करने लगे। यह मंजर बेहद डरावना था क्योंकि युवा अपने अधिकारों के लिए जान की बाजी लगाने पर उतारू थे। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने कड़ी मशक्कत के बाद युवाओं को पानी से बाहर निकाला। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी जायज मांगों पर गौर करने के बजाय उन्हें मौत के मुंह में धकेल रही है।
पुलिस की कार्रवाई: 10 अभ्यर्थी गिरफ्तार, मेडिकल के बहाने ले जाकर भेजा जेल
आंदोलन के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। डीएड अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 10 साथियों को मेडिकल चेकअप कराने की बात कहकर गाड़ी में बैठाया, लेकिन उन्हें अभनपुर थाना ले जाया गया। बाद में उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 170, 126 और 136 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें सीधे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। साथियों की गिरफ्तारी के बाद आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
98 दिनों का लंबा सफर: अनशन से लेकर अंगारों पर चलने तक की दास्तां
यह आंदोलन पिछले साल 24 दिसंबर से शुरू हुआ था। इन तीन महीनों में अभ्यर्थियों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए हर संभव जतन किए हैं। अभ्यर्थियों की मांगों की पूरी टाइमलाइन नीचे दी गई है:
- आमरण अनशन: 24 दिसंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत।
- मौन और कैंडल मार्च: अपनी चुप्पी के जरिए न्याय की पुकार और शाम को मोमबत्ती जलाकर विरोध।
- चाय और भीख अभियान: ‘एक कप चाय न्याय के नाम’ कार्यक्रम और सड़क पर सांकेतिक भीख मांगकर अपनी आर्थिक तंगी का प्रदर्शन।
- धार्मिक अपील: रामनवमी पर कलश यात्रा, हनुमान चालीसा पाठ और 14 मंत्रियों के नाम 108 दीप जलाना।
- कठोर प्रदर्शन: शरीर को कष्ट देने के लिए अंगारों पर चलना और जल सत्याग्रह करना।
- सीधा संवाद: कई बार शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव और उनसे मिलने की कोशिश।
शिक्षा मंत्री से गुहार: 2300 पदों पर अटकी है हजारों परिवारों की उम्मीद
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे मेरिट लिस्ट में चयनित हैं और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों के तहत उनकी नियुक्ति वैध है। इसके बावजूद 2300 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। अभ्यर्थियों ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द फैसला लें। यह केवल 2300 नौकरियों की बात नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के भविष्य और आत्मसम्मान से जुड़ा मामला है जो पिछले तीन महीने से सड़क पर रातें काट रहे हैं।
अनहोनी की आशंका: क्या टूटने लगा है भविष्य के शिक्षकों का धैर्य?
98 दिनों तक लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने के बाद अब इन युवाओं का धैर्य जवाब देने लगा है। जल समाधि और अंगारों पर चलने जैसे कदम इसी हताशा का परिणाम हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह इन युवाओं की चोटों पर मरहम लगाएगी या जेल और मुकदमों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।



