
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक निजी हायर सेकेंडरी स्कूल में शर्मनाक घटना सामने आई है। स्कूल के प्रिंसिपल के छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न (सैक्सुअल हरासमेंट) से परेशान होकर एक नाबालिग छात्रा ने आत्महत्या कर ली। यह मामला जशपुर के बगीचा थाना क्षेत्र का है, जहाँ छात्रा ने स्कूल के स्टडी रूम में फांसी लगाकर जान दे दी। छात्रा का शव मिलने के बाद पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया। पुलिस और एफएसएल की टीम तत्काल मौके पर पहुँची, जहाँ उन्हें छात्रा के शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला।
सुसाइड नोट में प्रिंसिपल पर लगाए गंभीर आरोप
मृतिका छात्रा के पास से बरामद हुए सुसाइड नोट में प्रिंसिपल पर छेड़छाड़ और हरासमेंट करने का स्पष्ट आरोप लिखा गया है। सुसाइड नोट को आधार बनाते हुए पुलिस ने तत्काल स्कूल के प्रिंसिपल कुलदीपन टोपनो को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपी प्रिंसिपल से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर रही है और मामले में अपराध दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है। इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, और मृतिका छात्रा के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
छात्रा की आत्महत्या पर दण्डाधिकारी जांच के आदेश
जशपुर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने इस गंभीर घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दण्डाधिकारी जांच के निर्देश दिए हैं। कक्षा 9वीं में अध्ययनरत छात्रा ने 23 नवंबर 2025 को भीतघरा (ग्राम गवासी) छात्रावास के स्टडी रूम में आत्महत्या की थी। कलेक्टर ने तत्काल एक समिति का गठन किया है, जिसे 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच समिति में बाल विकास और परामर्शदाता शामिल
दण्डाधिकारी जांच समिति में अनुविभागीय दण्डाधिकारी, बगीचा को अध्यक्ष बनाया गया है। उनके अलावा, समिति में विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, मण्डल संयोजक और परियोजना अधिकारी (एकीकृत बाल विकास) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत) और परामर्शदाता (आईसीपीएस जशपुर) जैसे विशेषज्ञ भी समिति के सदस्य होंगे। समिति को छात्रा की मृत्यु के कारणों, छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक या लापरवाही की पहचान करने और घटना किन परिस्थितियों में घटी, इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
7 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश
जांच अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक समझे जाने पर अन्य बिंदुओं को भी अपनी जांच में शामिल कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि समिति को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और छात्रावासों में सुरक्षा व सुधार संबंधी सुझाव भी अपनी रिपोर्ट में प्रस्तुत करने होंगे। कलेक्टर ने समिति को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सात दिवस के भीतर प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है
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