छत्तीसगढ़सरकारी योजना

देश का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सौर संयंत्र छत्तीसगढ़ में स्थापित

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में डोंगरगढ़ रोड पर स्थित ग्राम ढाबा और आसपास के गांवों में देश का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित (India’s largest battery energy storage solar plant in Chhattisgarh) किया गया है। यह आधुनिक संयंत्र रात में भी बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है, जिससे हरित ऊर्जा को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

रोजाना 5 लाख यूनिट बिजली उत्पादन, कार्बन उत्सर्जन में कमी

इस सोलर प्लांट (solar plant in Chhattisgarh) से प्रतिदिन 5 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसके साथ ही, यह संयंत्र हर साल लगभग 4.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा। इस परियोजना से छत्तीसगढ़ को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई पहचान मिली है।

सोलर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और छत्तीसगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की पहल

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को छत्तीसगढ़ सरकार की ऊर्जा एजेंसी क्रेडा (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) के नेतृत्व में विकसित किया गया है। संयंत्र की स्थापना का कार्य सोलर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) और छत्तीसगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को सौंपा गया था। 1 फरवरी 2024 को इसका निर्माण कार्य पूरा कर इसे कार्यशील कर दिया गया।

देश का पहला ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम, 100 मेगावॉट क्षमता

यह देश का पहला ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम है, जिसमें 100 मेगावॉट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित किया गया है। संयंत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 660 वॉट क्षमता वाले कुल 2,39,000 बाईफेसियल सोलर पैनल लगाए गए हैं। ये सौर पैनल दोनों ओर से सौर ऊर्जा को अवशोषित कर बिजली उत्पादन करने में सक्षम हैं।

960 करोड़ रुपये की लागत, 7 साल में वसूली की उम्मीद

इस पूरे सौर ऊर्जा संयंत्र की कुल परियोजना लागत 960 करोड़ रुपये है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना की लागत अगले सात वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से वसूल कर ली जाएगी।

बैरन पहाड़ी क्षेत्र का बेहतर उपयोग, 17 गांवों की भूमि आवंटित

छत्तीसगढ़ सरकार ने राजनांदगांव के बैरन पहाड़ी क्षेत्र का प्रभावी उपयोग करने के लिए इस सोलर पार्क की स्थापना का निर्णय लिया था। यह महत्वाकांक्षी योजना 2016 में शुरू हुई थी। परियोजना के लिए कुल 17 गांवों की 626.822 हेक्टेयर शासकीय भूमि की मांग की गई थी, जिसमें से 9 गांवों की 377.423 हेक्टेयर भूमि राजनांदगांव जिला प्रशासन द्वारा आवंटित की गई।

सोलर पार्क स्थापना के दो चरण

सोलर पार्क की स्थापना दो चरणों में की गई:

🔹 पहला चरण: इसमें ढाबा, कोहका, रेंगाकठेरा, डुंडेरा, अमलीडीह (तहसील डोंगरगांव) सहित 5 गांवों की 181.206 हेक्टेयर भूमि पर सोलर संयंत्र लगाया गया।
🔹 दूसरा चरण: इसमें ओडारबंध, गिरगांव, टोलागांव, घुघुवा (तहसील डोंगरगांव) सहित 4 गांवों की 196.217 हेक्टेयर भूमि पर संयंत्र स्थापित किया गया।

हरित ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा

यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न सिर्फ ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए आगे भी इस तरह की परियोजनाओं पर काम कर रही है।

छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता प्रभाव

यह सौर ऊर्जा परियोजना न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरी है। भविष्य में इसी तरह की और परियोजनाओं के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर ऊर्जा स्रोतों की दिशा में आगे बढ़ाने की योजना है।

Also Read: Abujhmad Peace Half Marathon 2025: शांति, फिटनेस, सामुदायिक भावना और बस्तर की अछूती सुंदरता का उत्सव

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button