
जांजगीर जिले में फर्जी अंकसूची और खेल प्रमाण पत्र के सहारे शिक्षाकर्मी की नौकरी पाने वाले शिक्षक चितरंजन प्रसाद कश्यप को अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अलग-अलग धाराओं में दो साल, तीन साल और एक-एक साल की सजा के साथ जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय जैजैपुर में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय जैजैपुर में हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपी ने कूटरचित अंकसूची और फर्जी खेल प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षाकर्मी की नौकरी हासिल की थी। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उसे सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
अंकसूची में बढ़ाए गए थे नंबर, सप्लीमेंट्री को दिखाया डिस्टिंक्शन
जानकारी के अनुसार, ग्राम मरघट्टी थाना हसौद निवासी चितरंजन प्रसाद कश्यप ने वर्ष 2007 में माल्दा स्थित पीतांबर हायर सेकेंडरी स्कूल से हायर सेकेंडरी विज्ञान की परीक्षा दी थी। उसके वास्तविक परिणाम में कुल 500 अंकों में 257 अंक थे और भौतिकी विषय में सप्लीमेंट्री आई थी।
आरोपी ने उसी वर्ष शिक्षाकर्मी पद के लिए आवेदन करते समय अंकसूची में कुल 500 में 405 अंक दर्शाए। भौतिकी में सप्लीमेंट्री की जगह डिस्टिंक्शन दिखाया और अन्य विषयों के अंक भी बढ़ा दिए। साथ ही खेलकूद का फर्जी प्रमाण पत्र भी जमा किया। इन दस्तावेजों के आधार पर उसे नौकरी मिल गई।
शिकायत के बाद खुला मामला, पुलिस जांच में हुई पुष्टि
वर्ष 2018 में ग्राम सेमरिया थाना जैजैपुर निवासी पोथीराम कश्यप ने पुलिस अधीक्षक जांजगीर से लिखित शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चितरंजन कश्यप ने फर्जी अंकसूची और कूटरचित खेल प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद थाना हसौद में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 474 के तहत अपराध दर्ज किया गया। वर्ष 2019 में विवेचना पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।
अदालत ने अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा
विचारण के दौरान गवाहों के बयान और दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी माना। अदालत ने धारा 420 में दो वर्ष, धारा 467 और 471 में तीन वर्ष, धारा 468 में एक वर्ष और धारा 474 में एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में भी चर्चा तेज हो गई है।



