
सूरजपुर से एक निजी स्कूल में अमानवीय सजा का सनसनीखेज मामला सामने आया है। रामानुजनगर थाना क्षेत्र के नारायणपुर में स्थित हंसवाहिनी विद्या मंदिर नामक प्राइवेट स्कूल की शिक्षिकाओं ने होमवर्क पूरा न करने पर एक बच्चे को उसके टी-शर्ट के सहारे पेड़ के तने से लटका दिया। बच्चा काफी देर तक पेड़ से लटकता रहा, जिसकी तस्वीर और वीडियो देखकर लोग सिहर गए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया है।

वीडियो बनाने वाले को रोकने की कोशिश
घटना के दौरान जब एक ग्रामीण ने शिक्षिकाओं के इस क्रूरतापूर्ण कृत्य का वीडियो बनाना शुरू किया, तो शिक्षिकाओं ने तुरंत बच्चे को नीचे उतारने की बजाय, उन्हें वीडियो बनाने से मना करते हुए रोकने की कोशिश की। इससे पता चलता है कि वे इस तालिबानी सजा पर पर्दा डालना चाहती थीं। वीडियो के आम होते ही स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिला और उन्होंने कड़ी कार्रवाई की मांग की।

‘मैडम कुएं में लटका देती हैं’, शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
घटनास्थल पर विरोध के दौरान, स्कूल के अन्य बच्चों ने शिक्षिका पर और भी गंभीर आरोप लगाए। बच्चों ने कहा कि मैडम उन्हें कुएं में भी लटका देती हैं। यह आरोप बेहद चिंताजनक और शिक्षा के मंदिर में क्रूरता की पराकाष्ठा को दिखाता है। वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल विभाग के अधिकारी को मौके पर भेजा है। विभाग की टीम फिलहाल मामले की जांच में जुट गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की बात कही गई है।
स्कूल प्रबंधन ने बताया ‘मामूली घटना’
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल के संचालक इस अमानवीय सजा को मामूली घटना बता रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चा पढ़ता नहीं था और उसे डराने के लिए ऐसा किया गया था। प्रबंधन की यह प्रतिक्रिया विभाग पर कई सवाल खड़े करती है। इस तरह की क्रूरतापूर्ण तस्वीरें सामने आने पर यह सवाल उठ रहा है कि जिस स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, उसे आखिर मान्यता कैसे मिल गई।
देखिये वीडियो-
कड़ी कार्रवाई की मांग पर प्रशासन हरकत में
अभिभावकों और ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर इस घटना पर अपना गुस्सा जाहिर किया। सभी ने मामले में संज्ञान लेकर प्रशासन से मांग रखी है कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा के मंदिर में ऐसी क्रूरता दोबारा न दोहराई जा सके। ग्रामीणों के बढ़ते विरोध और वीडियो के वायरल होने के बाद ही शिक्षा विभाग हरकत में आया है और जांच शुरू कर दी गई है।
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