
छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में इन दिनों शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा नियमों में किए जा रहे संभावित बदलावों ने हजारों शिक्षकों की नींद उड़ा दी है। शिक्षकों का मानना है कि यदि इस नियम को सख्ती से लागू किया गया, तो सालों से सेवा दे रहे गुरुजी भी संकट में आ सकते हैं। इसी असमंजस और चिंता को दूर करने के लिए प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
रायपुर में महामंथन: 15 मार्च को जुटेगा शिक्षक संगठनों का हुजूम
TET अनिवार्यता के खिलाफ रणनीति तैयार करने के लिए 15 मार्च को राजधानी रायपुर में एक बड़ी बैठक बुलाई गई है। यह अहम बैठक राजपत्रित कर्मचारी संघ कार्यालय में दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। इसमें किसी एक गुट के नहीं, बल्कि प्रदेश के लगभग सभी सक्रिय शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है कि यह बैठक छत्तीसगढ़ के शैक्षिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि यहाँ से शिक्षकों के भविष्य का रास्ता तय होगा।
80 हजार शिक्षकों पर संकट: नौकरी और पदोन्नति पर लटकी तलवार
आंकड़ों की मानें तो इस नए नियम की जद में राज्य के लगभग 80,000 शिक्षक आ सकते हैं। इनमें से कई शिक्षक ऐसे हैं जो वर्षों से दूरस्थ अंचलों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, लेकिन उनके पास वर्तमान मापदंडों वाली TET की डिग्री नहीं है। यदि सरकार इस योग्यता को अनिवार्य करती है, तो न केवल नई नियुक्तियां बल्कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) और सेवा निरंतरता पर भी गहरा असर पड़ सकता है।
जिलों से जुटेंगे दिग्गज: सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, बैठक में बस्तर से लेकर सरगुजा तक के हर जिले से शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा केवल विरोध दर्ज कराना नहीं है, बल्कि उन कानूनी और तकनीकी पहलुओं को समझना है जिनके आधार पर सरकार को घेरा जा सके। सभी संगठनों का लक्ष्य एक साझा मंच तैयार करना है, ताकि बिखराव के बजाय एक स्वर में अपनी बात शासन के समक्ष रखी जा सके।
आर-पार की रणनीति: मांगें नहीं मानी तो आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा
15 मार्च की बैठक में सिर्फ चर्चा नहीं होगी, बल्कि भविष्य के आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे पहले शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। यदि सरकार ने उनकी चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो प्रदेश स्तर पर जेल भरो आंदोलन या सड़कों पर उतरने जैसे कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इस बैठक में तय किया जाएगा कि बातचीत का रास्ता अपनाना है या संघर्ष का।
क्या होगा आगे? शिक्षकों की निगाहें रायपुर के फैसले पर
शिक्षकों के भविष्य के लिहाज से इस रविवार को होने वाली बैठक को ‘सुपर संडे’ माना जा रहा है। समूचे प्रदेश के शिक्षा विभाग की नजरें राजपत्रित कर्मचारी संघ कार्यालय पर टिकी होंगी। क्या शिक्षक संगठन सरकार को झुकने पर मजबूर कर पाएंगे या फिर TET की अनिवार्यता शिक्षकों के करियर के लिए एक नई बाधा बनेगी, इसका फैसला इस महाबैठक के बाद ही साफ हो पाएगा।



