
छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी बजट सत्र की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। 23 फरवरी से शुरू होने वाले इस सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। सदन की कार्यवाही के लिए विधायकों द्वारा जनहित और विभागीय नियमों से जुड़े सवाल लगाए जा रहे हैं। इस बार सदन की राजनीति में ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (TET) की अनिवार्यता का मुद्दा सबसे अधिक गर्माने के आसार हैं, जिसे लेकर शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।
विधायक बालेश्वर साहू ने उठाए नीतिगत सवाल
विधायक बालेश्वर साहू ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के समक्ष TET परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल दागे हैं। उन्होंने शासन से उन शिक्षकों की कुल संख्या की जिलेवार जानकारी मांगी है, जिन्हें नियमों के तहत यह परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। विधायक ने यह जानने की भी कोशिश की है कि क्या इस तरह की पात्रता परीक्षा केवल शिक्षा विभाग तक ही सीमित है या शासन के अन्य विभागों में भी पदों के अनुरूप ऐसी कोई अनिवार्य परीक्षा ली जाती है।
न्यायालयीन पक्ष और शासन की कार्ययोजना
सदन में इस बात पर भी चर्चा होगी कि क्या TET की अनिवार्यता से संबंधित नियमों को लेकर शासन ने माननीय न्यायालय के समक्ष अपना कोई पक्ष प्रस्तुत किया है। विधायक ने सरकार से पूछा है कि यदि इस विषय पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, तो भविष्य में शासन की क्या विचार या कार्यवाही प्रस्तावित है। यह सवाल उन हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है जो वर्तमान में कार्यरत हैं लेकिन पात्रता परीक्षा के पेच में फंसे हुए हैं।
2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की स्थिति पर संशय
एक बड़ा सवाल वर्ष 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों की नीति को लेकर उठाया गया है। विधायक ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि TET लागू होने (वर्ष 2011) से पहले सेवा में आए शिक्षकों के लिए पदोन्नति और अनिवार्यता के नियमों में क्या कोई शिथिलता (छूट) दी गई है। यदि ऐसी कोई नीति या निर्देशिका शासन ने तैयार की है, तो उसका संक्षिप्त विवरण क्या है? इससे उन पुराने शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ होने की उम्मीद है जो लंबे समय से असमंजस में हैं।
23 फरवरी से 20 मार्च तक चलेगा सत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, बजट सत्र 23 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 20 मार्च 2026 तक चलेगा। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र के दौरान सरकार अपना वार्षिक बजट प्रस्तुत करेगी, जिस पर विस्तृत चर्चा होगी। विधायकों के बढ़ते सवालों को देखते हुए विपक्षी खेमा सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में नजर आ रहा है।
विभागों में अलर्ट और छुट्टियों पर रोक
विधानसभा सत्र की गंभीरता को देखते हुए सभी सरकारी विभागों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग प्रमुखों के साथ-साथ कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं। विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब समय सीमा में तैयार करने और जरूरी दस्तावेज विधानसभा सचिवालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल रही है। शिक्षा विभाग विशेष रूप से TET से जुड़े आंकड़े जुटाने में व्यस्त है ताकि सदन में सटीक जानकारी दी जा सके।



