
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में 9 से 13 जनवरी तक प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी’ को लेकर सियासी और कानूनी घमासान तेज हो गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने खुद को भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राज्य परिषद का वैधानिक अध्यक्ष बताते हुए इस आयोजन को स्थगित करने का ऐलान कर दिया है। मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है। अग्रवाल ने अदालत में याचिका दायर कर तर्क दिया है कि उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने की कोशिशें पूरी तरह असंवैधानिक हैं। इस विवाद ने संगठन के भीतर दो फाड़ कर दिए हैं, जहां एक तरफ बृजमोहन अग्रवाल अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं, तो दूसरी तरफ स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष बताया जा रहा है।
हाईकोर्ट में बृजमोहन की दलील: ‘बिना सूचना पद से हटाना गलत’, एकतरफा कार्रवाई को बताया अलोकतांत्रिक
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी याचिका में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उन्हें पद से हटाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का मौका मिला। अग्रवाल के मुताबिक, वे परिषद के निर्वाचित अध्यक्ष हैं और इसी अधिकार से उन्होंने 5 जनवरी को जंबूरी की तैयारी बैठक भी ली थी। याचिका में मांग की गई है कि इस मनमानी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट इस संवेदनशील मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है, जिससे यह तय होगा कि संगठन की कमान वास्तव में किसके हाथ में है।
10 करोड़ के घोटाले का आरोप: ‘नवा रायपुर के बजाय बालोद क्यों गया आयोजन?’, अग्रवाल ने उठाए तीखे सवाल
बृजमोहन अग्रवाल ने जंबूरी के आयोजन को रद्द करने के पीछे वित्तीय अनियमितता का बड़ा कारण बताया है। उनका सीधा आरोप है कि इस आयोजन के टेंडर और अन्य व्यवस्थाओं में करीब 10 करोड़ रुपये की गड़बड़ी हुई है। अग्रवाल ने सवाल उठाया कि जब यह कार्यक्रम पहले से नवा रायपुर में प्रस्तावित था, तो अचानक बिना किसी वैधानिक अनुमति के इसे बालोद जिले में क्यों स्थानांतरित कर दिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अध्यक्ष रहते हुए भी उन्हें अंधेरे में रखकर कार्यक्रम की रूपरेखा और स्थान बदल दिए गए, जो कि भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।
विवाद की जड़ में 13 दिसंबर का आदेश: मंत्री खेमे के दावे से शुरू हुई खींचतान, सरकार ने जारी किया अपना पक्ष
इस पूरे विवाद की चिंगारी 13 दिसंबर 2025 को तब भड़की, जब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के कार्यालय से एक पत्र जारी किया गया। इस पत्र में मंत्री को संगठन का पदेन अध्यक्ष बताया गया। इसके बाद से ही अधिकारों की लड़ाई सड़क पर आ गई। एक तरफ अग्रवाल अपनी पुरानी सक्रियता का हवाला दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी तंत्र मंत्री के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने एक ताजा प्रेस नोट जारी कर साफ किया है कि जंबूरी अपने तय समय पर 9 से 13 जनवरी तक बालोद के दुधली में ही होगी और तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
अदालती फैसले पर टिकी जंबूरी की किस्मत: क्या 9 जनवरी से शुरू हो पाएगा कार्यक्रम? प्रशासन में मची हलचल
मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जंबूरी में शामिल होने के लिए देशभर से रोवर और रेंजर छत्तीसगढ़ पहुंचने वाले हैं, लेकिन अध्यक्ष पद की इस कानूनी जंग ने आयोजन की वैधता पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। अब सबकी नजरें अदालत के अंतरिम फैसले पर टिकी हैं। यदि कोर्ट ने आयोजन पर रोक लगाई या यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, तो राज्य सरकार के लिए यह बड़ी फजीहत का सबब बन सकता है। फिलहाल, बालोद में टेंट लग रहे हैं और बिलासपुर में कानूनी दलीलें तैयार की जा रही हैं।
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