
राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के नवजात बच्चे को अवैध तरीके से गोद लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बोरतालाब थाना क्षेत्र की इस घटना में पुलिस ने भिलाई के एक दंपति को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि नगर निगम से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेना दिखाया गया था। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए दंपति के पास से सुरक्षित नवजात शिशु को बरामद कर लिया है। पकड़े गए दंपति को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से पड़ताल कर रही है।
अस्पताल के भीतर से चला गोद देने का नेटवर्क
इस पूरे मामले की जड़ें शहर के निजी अस्पतालों से जुड़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि नाबालिग पीड़िता की डिलीवरी एक निजी अस्पताल में गोपनीय तरीके से कराई गई थी। इसके बाद अस्पताल के स्टाफ और एक डॉक्टर ने मिलकर बच्चे को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया। साजिश के तहत बच्चे के असली माता-पिता की जानकारी छिपाई गई और फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए। इसी हेरफेर के आधार पर सरकारी दफ्तरों से झूठा जन्म प्रमाण पत्र जारी करवाया गया। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिनके जरिए सरकारी सिस्टम में सेंध लगाकर यह अवैध काम किया गया।
पुलिस की रडार पर अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ
मामले का मुख्य संदिग्ध डॉ. विजय फिलहाल फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। एसपी अंकिता शर्मा के मुताबिक, कृष्णा हॉस्पिटल और कुमुद महोबे मेमोरियल हॉस्पिटल के कुछ कर्मचारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह कोई संगठित गिरोह है जो मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चों की खरीद-फरोख्त करता है। अस्पताल प्रशासन से भी कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि नियमों को ताक पर रखकर यह सौदा कैसे हुआ और इसमें कितने पैसे का लेनदेन हुआ।
दुष्कर्म का आरोपी किशोर पहले ही हो चुका है गिरफ्तार
जिस नाबालिग लड़की के बच्चे को गोद दिया गया, वह खुद एक जघन्य अपराध की शिकार हुई थी। उसके साथ दुष्कर्म करने वाले नाबालिग किशोर को पुलिस पहले ही अपनी हिरासत में ले चुकी है। पीड़िता के परिवार ने लोक-लाज के डर से शायद इस गुप्त तरीके को अपनाया, जिसका फायदा बिचौलियों ने उठाया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भले ही परिवार की सहमति रही हो, लेकिन कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर किसी बच्चे को गोद लेना या देना अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर गोद लेने वाले भिलाई के दंपति पर कार्रवाई की गई है।
शिशु की सुरक्षा और अस्पतालों को सख्त चेतावनी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बरामद किए गए नवजात शिशु और पीड़िता की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। शिशु को वर्तमान में बाल संरक्षण इकाई की देखरेख में रखा गया है। पुलिस कप्तान ने चेतावनी दी है कि जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड में हेराफेरी करने वाले अस्पतालों पर सख्त कानूनी गाज गिरेगी। आने वाले दिनों में जिले के अन्य निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड की भी जांच हो सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और इस तरह के अवैध काम तो नहीं चल रहे हैं। पुलिस अब डॉ. विजय की गिरफ्तारी का इंतजार कर रही है ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।



