शिक्षकों की कमी से बेहाल हुई शिक्षा व्यवस्था: 51,663 से ज्यादा पद खाली, 7 महीने में 6 हजार शिक्षकों ने छोड़ी नौकरी

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी एक गंभीर चुनौती बन गई है। पिछले सात महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी खराब हुई है। रिटायरमेंट और नौकरी छोड़ने की वजह से 6,434 पद और खाली हो गए हैं। सात महीने पहले तक राज्य में 45,229 शिक्षकों की कमी थी जो अब बढ़कर 51,663 तक पहुंच गई है। रिक्त पदों की इस लंबी फेहरिस्त में सहायक शिक्षक, व्याख्याता और प्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। हालात इतने चिंताजनक हैं कि प्रदेश के कई स्कूल बिना गुरुजी के ही संचालित हो रहे हैं।

30 स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन, 1791 में सिर्फ एक का सहारा

सरकार द्वारा स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के दावों के बावजूद धरातल पर तस्वीर काफी अलग है। प्रदेश में 30 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। वहीं 1,791 स्कूल महज एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इसमें सबसे खराब हालत प्राथमिक शालाओं की है जहां 1,741 स्कूलों में सिर्फ एक टीचर ही बच्चों को पढ़ा रहा है। राजधानी रायपुर संभाग की बात करें तो यहां के 169 प्राथमिक और 11 माध्यमिक स्कूलों में भी एकल शिक्षक की समस्या बनी हुई है। गरियाबंद जिले के 4 स्कूलों में तो ताला लटकने की नौबत है क्योंकि वहां कोई भी पढ़ाने वाला मौजूद नहीं है।

सहायक शिक्षकों के पदों पर सबसे बड़ा संकट

कुल खाली पड़े पदों में से लगभग आधे पद सहायक शिक्षकों के हैं। अप्रैल में जहां 18,664 सहायक शिक्षकों की कमी थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 24,113 हो गया है। शिक्षा विभाग ने हाल ही में प्रमोशन के जरिए कुछ रिक्तियों को भरने की कोशिश की है लेकिन प्राचार्य और व्याख्याता के स्तर पर अभी भी बहुत काम बाकी है। विभाग ने प्रमोशन तो किए हैं पर निचले स्तर पर नई नियुक्तियां न होने के कारण सहायक शिक्षकों की कमी का संकट और गहरा गया है।

33 हजार भर्तियों का वादा और जमीनी हकीकत

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने राज्य में 33,000 शिक्षकों की सीधी भर्ती करने का भरोसा दिया था। इसमें 22,341 सहायक शिक्षक, 8,194 शिक्षक और 2,524 व्याख्याताओं के पद शामिल हैं। फिलहाल सरकार ने पहले चरण में करीब 5,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिक्त पदों की विशाल संख्या को देखते हुए 5,000 की भर्ती नाकाफी है। जब तक सभी घोषित 33,000 पदों पर तेजी से नियुक्ति नहीं होती, तब तक प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना मुमकिन नहीं होगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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