
Dhamtari Gangrel Dam: धमतरी में बीते चार दिनों से हो रही लगातार बारिश ने इलाके के किसानों और जल संसाधन विभाग को थोड़ी राहत जरूर दी है। जिले के प्रमुख बांधों में धीरे-धीरे पानी बढ़ रहा है। गंगरेल बांध, जिसे रविशंकर जलाशय के नाम से भी जाना जाता है, उसमें जलस्तर 20 जुलाई तक 53.46 प्रतिशत था, जो 24 जुलाई को बढ़कर 56.26 प्रतिशत हो गया। यानी चार दिनों में तीन प्रतिशत का सुधार दर्ज हुआ। हालांकि ये संख्या अब भी पूरी क्षमता से काफी कम है, लेकिन ये इशारा करती है कि मानसून यदि इसी तरह बना रहा, तो हालात सुधर सकते हैं।
केचमेंट में बारिश, लेकिन अभी मंज़िल दूर
Dhamtari Weather: गंगरेल डैम के केचमेंट एरिया यानी वह इलाका जहां से पानी इस डैम में आता है, वहां 24 जुलाई को 61 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस समय डैम का जलस्तर 344.70 मीटर है और पानी की आवक 1935 क्यूसेक मापी गई है। यह आंकड़ा अच्छा तो है, पर डैम की लाइव स्टोरेज कैपेसिटी 27.079 टीएमसी है और अभी केवल उसका आधा ही भर पाया है। यानी डैम को पूरी तरह लबालब भरने के लिए अच्छी और लगातार बारिश की ज़रूरत अब भी बरकरार है।
माडमसिल्ली डैम में मामूली इजाफा, लेकिन राहत नहीं
Dhamtari News: गंगरेल के साथ-साथ माडमसिल्ली डैम में भी पानी आया है, लेकिन ये बढ़ोतरी उतनी नहीं है कि राहत की सांस ली जा सके। डैम का जलस्तर अब 369.22 मीटर तक पहुंचा है। जहां पहले इसमें 21.91 प्रतिशत पानी था, अब यह बढ़कर 25.59 प्रतिशत हो गया है। यहां की लाइव कैपेसिटी 1.46 टीएमसी है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पानी का यह इजाफा शुरुआत भर है। अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
सोंदूर डैम में चार दिन में चार प्रतिशत पानी और भरा
सोंदूर डैम की बात करें तो यहां भी बीते कुछ दिनों की बारिश ने असर दिखाया है। गुरुवार को 17 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे डैम का जलस्तर 464.17 मीटर तक पहुंचा है। यहां लाइव कैपेसिटी 1.774 टीएमसी है और अब तक यह 27.94 प्रतिशत तक भर चुका है। जबकि 20 जुलाई को यह 23.20 प्रतिशत था। यानी चार दिन में यहां भी पानी ने रफ्तार पकड़ी है, लेकिन ये स्थिर रफ्तार है, तेज नहीं।
दुधावा डैम की चाल धीमी, आवक भी कमजोर
दुधावा डैम की तस्वीर थोड़ी फीकी है। यहां सिर्फ 9 मिमी बारिश हुई है और जलस्तर बढ़कर 417.29 मीटर तक ही पहुंच पाया है। डैम की लाइव स्टोरेज 2.283 टीएमसी है, और अभी इसमें 22.75 प्रतिशत पानी भरा है। बीते चार दिनों में सिर्फ 0.89 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यहां की पानी की आवक 265 क्यूसेक है, जो फिलहाल बहुत कम मानी जा रही है। यानी यहां पानी बढ़ा जरूर है, लेकिन बेहद धीमी गति से।
रूद्री बैराज की स्थिति बेहतर, लेकिन अभी और चाहिए पानी
अगर पूरे जिले के आंकड़ों को देखें तो रूद्री बैराज ही एकमात्र ऐसा जल स्रोत है जो थोड़ा बेहतर स्थिति में है। यहां जलस्तर 322.66 मीटर है और डैम 69.75 प्रतिशत तक भर चुका है। हालांकि, ये आंकड़ा भी स्थिर नहीं है क्योंकि बारिश में जरा भी कमी आई तो इसमें भी गिरावट शुरू हो सकती है।



