
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में फंसे पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत अर्जी पर आज देश की सर्वोच्च अदालत में अहम सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर विचार करेगी। लखमा लंबे समय से इस मामले में राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अदालतों से कोई बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। आज की सुनवाई पर न केवल राजनीतिक गलियारों बल्कि कानूनी जानकारों की भी पैनी नजर टिकी हुई है।
करोड़ों के कमीशन और सिंडिकेट का आरोप
कवासी लखमा पर आरोप है कि उन्होंने प्रदेश के कथित शराब घोटाले में सिंडिकेट के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का अवैध कमीशन लिया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके कार्यकाल के दौरान शराब की बिक्री और वितरण में व्यापक अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसी का तर्क है कि सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाकर एक खास गिरोह को फायदा पहुँचाया गया, जिसमें लखमा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
निचली अदालतों से अब तक नहीं मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले कवासी लखमा ने निचली अदालतों और हाईकोर्ट में भी जमानत के लिए गुहार लगाई थी। हालांकि जांच एजेंसियों ने हर बार उनकी रिहाई का पुरजोर विरोध किया। एजेंसियों का कहना है कि लखमा एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और बाहर आने पर वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसी आधार पर उनकी न्यायिक हिरासत बार-बार बढ़ाई जाती रही है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में मची हलचल
पूर्व मंत्री की जमानत पर होने वाली इस सुनवाई ने छत्तीसगढ़ की सियासत में भी सरगर्मी बढ़ा दी है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत बता रहा है, वहीं लखमा के समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष का मामला करार दे रहे हैं। चूंकि कवासी लखमा बस्तर क्षेत्र के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं, इसलिए उनकी जेल में मौजूदगी या रिहाई का असर आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति पर पड़ना तय है।
आज की सुनवाई से क्या हैं उम्मीदें
आज कोर्ट में लखमा के वकील उनके स्वास्थ्य और जांच में सहयोग का हवाला देकर राहत की मांग कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी पक्ष घोटाले की गंभीरता और लखमा के खिलाफ मिले साक्ष्यों को पेश करेगा। अगर आज कोर्ट उन्हें जमानत दे देता है, तो यह उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित होगी। फिलहाल सभी की निगाहें दिल्ली स्थित अदालत के फैसले पर टिकी हैं कि क्या पूर्व मंत्री को जेल की सलाखों से बाहर आने का मौका मिलेगा या नहीं।



