
धमतरी Dhamtari News: नगर निगम धमतरी एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। निगम के भीतर ठेके, सप्लाई और सफाई व्यवस्था से जुड़े कई मामलों में अनियमितताओं की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और पार्षदों का कहना है कि नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता की भारी कमी है और चहेते ठेकेदारों को बिना टेंडर के ही काम दे दिए जा रहे हैं।
चहेते ठेकेदारों को ठेका, इंजीनियरिंग विंग पर सवाल
जानकारी के अनुसार, निगम के इंजीनियरिंग विंग और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ ठेकेदारों और सप्लायर कंपनियों को नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से बैकडोर एंट्री दी जाती है। कई कार्य बिना टेंडर के ही स्वीकृत कर लिए गए हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, निगम का बायो माइनिंग प्रोजेक्ट पूरी तरह विफल हो चुका है। डंपिंग ग्राउंड से कचरा सही ढंग से नहीं हटाया जा रहा, उल्टे निगम को करोड़ों रुपये कंपनियों को चुकाने पड़ रहे हैं।

भ्रष्टाचार से जनता परेशान, हर काम में तय रेट का खेल
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि नगर निगम में हर छोटे-बड़े काम के लिए “रेट फिक्स” है। चाहे टेंडर पास कराना हो, नक्शा मंजूर करवाना हो या सफाई कार्य, बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता।
जनता का कहना है कि यह व्यवस्था शहर के विकास के बजाय निजी लाभ पर केंद्रित हो चुकी है। जिनसे पैसे नहीं मिलते, उनका काम रोक दिया जाता है।
विकास की हकीकत पर उठे सवाल
निगम में अब तीसरा कार्यकाल चल रहा है। पहले भाजपा, फिर कांग्रेस और अब फिर भाजपा की सत्ता है, लेकिन नागरिकों के अनुसार विकास की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
कई करोड़ों के प्रोजेक्ट मंजूर तो हुए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर स्वच्छता मिशन तक, कई योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि अगर पीएम आवास योजना की गहन जांच की जाए, तो कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ सकती है।
घूसखोरी के ताजा मामले से गरमाई सियासत
हाल ही में निगम कर्मचारी सुनील साळुंके पर ₹25,000 की रिश्वत लेने का आरोप लगा है। मामले में डिप्टी कमिश्नर की संलिप्तता भी सामने आई है। जांच की बात कही गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस घटना के बाद से सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की मांग की है।
जांच की मांग और आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन को तीन दिनों में कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया था और जांच न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। अब तय समय बीत चुका है, लेकिन जांच शुरू नहीं हुई है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि मामला “सेटिंग” की ओर बढ़ रहा है, जबकि जनता इस पूरे प्रकरण के नतीजे का इंतजार कर रही है।
जनता के भरोसे की परीक्षा
धमतरी नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होगी या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। दीपावली का त्योहार नजदीक है, ऐसे में शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार प्रकाश का पर्व प्रशासनिक अंधकार को दूर करने का भी कारण बने।



