
रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र अंतर्गत भलेरा सहकारी समिति से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यहाँ समिति के कर्मचारियों द्वारा धान की बोरियों में पाइप के जरिए पानी डालकर उन्हें भिगोने का कृत्य रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इलाके में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने को चूना लगाने और धान का वजन अवैध रूप से बढ़ाने की एक सोची-समझी साजिश है।
होली की छुट्टी और सन्नाटे का उठाया गया फायदा
ग्रामीणों के अनुसार, समिति प्रबंधन और कर्मचारियों ने इस धोखाधड़ी के लिए होली के अगले दिन का समय विशेष रूप से चुना। उन्हें उम्मीद थी कि त्यौहार की खुमारी के कारण गांवों में हलचल कम होगी और लोग अपने घरों में व्यस्त रहेंगे, जिससे वे आसानी से इस काले कारनामे को अंजाम दे सकेंगे। हालांकि, सतर्क ग्रामीणों की नजरों से यह धांधली छिप नहीं सकी और पाइप से धान की बोरियों को तर-बतर करने का दृश्य मोबाइल कैमरे में कैद हो गया।
पाइप से पानी डालकर वजन बढ़ाने की बड़ी साजिश
मिली जानकारी के अनुसार, जब समिति परिसर के भीतर धान की बोरियों पर पानी की बौछार की जा रही थी, तब एक ग्रामीण ने छिपकर इसका वीडियो बना लिया। जानकारों का कहना है कि धान की बोरियों में पानी डालने से उनका वजन बढ़ जाता है, जिससे भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के समय होने वाली कमी को छुपाया जा सकता है या अतिरिक्त धान का लाभ उठाया जा सकता है। यह न केवल सरकारी धन की चोरी है, बल्कि अनाज की गुणवत्ता को भी खराब करने वाला कृत्य है।
टोकन और खाद वितरण में अवैध वसूली के गंभीर आरोप
घटना उजागर होने के बाद जब सैकड़ों ग्रामीण मंडी परिसर पहुंचे, तो उन्होंने व्यवस्थापक विष्णु साहू के सामने अन्य कई समस्याओं का भी पिटारा खोल दिया। किसानों ने आरोप लगाया कि धान खरीदी के दौरान टोकन काटने के नाम पर प्रत्येक किसान से 300 से 400 रुपये की अवैध वसूली की गई। यही नहीं, ऋण और खाद वितरण के समय भी ‘चाय-पानी’ के नाम पर पैसे लिए गए। किसानों का कहना है कि वे अब तक इसलिए चुप थे ताकि उनकी फसल बिना किसी बाधा के बिक जाए।
समिति अध्यक्ष की फटकार ने ‘आग में घी’ का काम किया
मंडी परिसर में जब ग्रामीणों ने इस धांधली को लेकर समिति अध्यक्ष से सवाल पूछे, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, अध्यक्ष ने समाधान निकालने के बजाय किसानों को ही फटकार लगाते हुए कहा, “तुम्हारा धान तो बिक गया और बोनस भी मिल गया, अब तुम्हें क्या दिक्कत है? चुप रहो।” अध्यक्ष के इस अहंकारपूर्ण बयान ने ग्रामीणों के आक्रोश को और भड़का दिया, जिसके बाद मंडी में स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
किसानों की मेहनत और सरकारी पारदर्शिता पर प्रहार
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इस तरह की हरकतें ईमानदार किसानों की मेहनत के साथ खिलवाड़ हैं। कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की लालसा के कारण पूरी सरकारी व्यवस्था और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि धान को भिगोने से वह खराब हो सकता है और मिलिंग के समय सरकार को भारी नुकसान होगा। इस घटना ने एक बार फिर सहकारी समितियों में होने वाली निगरानी प्रणाली की पोल खोल दी है।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
भलेरा के आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। किसानों का कहना है कि केवल जांच ही काफी नहीं है, बल्कि वीडियो साक्ष्य के आधार पर दोषियों को तत्काल बर्खास्त कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्ट तंत्र पर लगाम नहीं कसी गई, तो वे आने वाले समय में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



