सर्पदंश से मौत पर सरकार देती है 4 लाख का मुआवजा: जानें कैसे करना होगा आवेदन और किन कागजों की होगी जरूरत

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में सांप के काटने से होने वाली मौतों को अब ‘राज्य आपदा’ की श्रेणी में रखा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु सर्पदंश से होती है, तो उसका परिवार सरकारी मुआवजे का हकदार है। अक्सर जानकारी की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में लोग इस सहायता राशि को पाने से चूक जाते हैं। कानूनी जानकारों के अनुसार, सरकार पीड़ित परिवार को इस कठिन समय में सहारा देने के लिए 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद देती है। कुछ विशेष परिस्थितियों में, यदि वन विभाग की ओर से भी सहायता जुड़ती है, तो यह राशि 5 लाख रुपये तक भी पहुंच सकती है।

सबसे पहले करें यह काम: प्रशासन और पुलिस को सूचना देना अनिवार्य

सर्पदंश की अप्रिय घटना होते ही परिवार को सबसे पहले स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना देनी चाहिए। इसमें नजदीकी थाना, तहसीलदार या राजस्व निरीक्षक (पटवारी) को खबर करना शामिल है। यह शुरुआती सूचना मुआवजा फाइल तैयार करने का आधार बनती है। यदि सूचना समय पर नहीं दी गई, तो बाद में दावे की पुष्टि करना काफी मुश्किल हो जाता है। पुलिस को सूचना देने से मामले का पंचनामा तैयार होता है, जो आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण सबूत माना जाता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट है सबसे जरूरी: इसके बिना नहीं मिलेगा एक भी रुपया

मुआवजे की पूरी प्रक्रिया में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भूमिका सबसे अहम होती है। अधिवक्ता बताते हैं कि बिना पोस्टमार्टम कराए सरकारी सहायता पाना लगभग नामुमकिन है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर द्वारा मृत्यु का कारण स्पष्ट रूप से ‘सर्पदंश’ लिखा जाना चाहिए। अक्सर लोग भावनात्मक कारणों या जानकारी न होने के कारण शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाते, जिससे वे बाद में मुआवजे के अधिकार से वंचित रह जाते हैं। इसलिए अस्पताल ले जाते समय ही इस प्रक्रिया को पूरा करने पर जोर देना चाहिए।

इन दस्तावेजों को रखें तैयार: आवेदन के समय पड़ेगी इनकी आवश्यकता

मुआवजा प्राप्त करने के लिए कुछ जरूरी कागजी कार्यवाही पूरी करनी होती है। आवेदन के साथ आपको ये दस्तावेज संलग्न करने होंगे:

  • मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र।
  • अस्पताल से मिली मूल पोस्टमार्टम रिपोर्ट।
  • मृतक के कानूनी वारिसों (नॉमिनी) के आधार कार्ड।
  • बैंक खाते की पासबुक की फोटोकॉपी या कैंसिल चेक।
  • पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर या पंचनामा की कॉपी।
  • राजस्व विभाग से प्राप्त क्लेम फॉर्म।

कहां और कैसे जमा करें फाइल: 15 दिनों के भीतर पूरी करें प्रक्रिया

सभी जरूरी कागजात जुटाने के बाद आपको अपने क्षेत्र के एसडीएम (SDM), तहसीलदार या जिला कलेक्टर कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि यह आवेदन घटना के 15 दिनों के भीतर ही जमा कर देना चाहिए ताकि जांच समय पर शुरू हो सके। आवेदन जमा होने के बाद राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर घटना की जांच करते हैं और अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजते हैं। एक बार रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद फाइल को अंतिम मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाता है।

बैंक खाते में आएगी सीधे राशि: डीबीटी के जरिए होता है भुगतान

जब प्रशासन की ओर से मुआवजे की फाइल पास हो जाती है, तो सहायता राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू होती है। सरकार अब भ्रष्टाचार रोकने के लिए सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पैसा भेजती है। इसे ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) कहा जाता है। इसलिए आवेदन करते समय बैंक विवरण (IFSC कोड और खाता संख्या) बिल्कुल सही देना चाहिए। आमतौर पर राज्य आपदा राहत निधि (SDRF) से 4 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है, जो सीधे मृतक के आश्रितों को प्राप्त होता है।

सावधानी और जागरूकता है बचाव: झाड़-फूंक के चक्कर में न गंवाएं समय

मुआवजे की प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन जान बचाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में कई बार लोग सांप काटने के बाद अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद कर देते हैं। इससे न केवल मरीज की जान को खतरा होता है, बल्कि यदि मृत्यु हो जाए तो पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी कागजात तैयार करने में भी दिक्कत आती है। सही समय पर अस्पताल पहुंचना और डॉक्टर से इलाज कराना ही कानूनी और स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे सुरक्षित कदम है।

विधिक साक्षरता की भूमिका: अपने अधिकारों को पहचानें

बिलासपुर के वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक साक्षरता की कमी के कारण बहुत से पात्र परिवार आज भी भटक रहे हैं। सरकार ने यह नियम इसलिए बनाया है ताकि गरीब परिवारों को आर्थिक तबाही से बचाया जा सके। यदि आवेदन के दौरान कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है या फाइल को बेवजह रोकता है, तो इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की जा सकती है। अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर ही आप सरकार की इस जनहितकारी योजना का लाभ ले सकते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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