
रायपुर: CG Liquor Policy: छत्तीसगढ़ में शराब राज्य सरकार की कमाई का एक बड़ा और महत्वपूर्ण जरिया है। सरकार अब अपनी आय बढ़ाने और अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में लागू की गई शराब नीति में बदलाव करने पर विचार कर रही है। यही कारण है कि नई शराब नीति लाने के लिए छह महीने पहले से ही मंथन शुरू हो गया है।
सरकारी सिस्टम से ठेका पद्धति की ओर बदलाव संभव
डॉ. रमन सिंह ने साल 2017 में शराब का सरकारी सिस्टम लागू किया था, जिसके तहत शराब का पूरा नियंत्रण राज्य मार्केटिंग कार्पोरेशन के हवाले कर दिया गया था। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार भी इसी सिस्टम का अनुसरण कर रही थी।
अब सरकार इस नीति को बदलकर शराब की बिक्री को सरकारी सिस्टम से निकालकर वापस ठेका सिस्टम (Private Licensing) पर लाने पर विचार कर रही है। आबकारी विभाग को लगता है कि ठेका पद्धति से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, ग्राहकों को शराब सस्ते में मिलती है, और सरकार की कमाई लाइसेंस शुल्क से सुनिश्चित होती है, जिससे राजस्व का लक्ष्य पूरा हो सकता है।
राजस्व का लक्ष्य पूरा करने में विफल सरकार
पिछले कुछ सालों में शराब से सरकार का राजस्व लगभग दोगुना हो गया है और पीने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सरकार लगातार अपने कमाई के टारगेट को पूरा नहीं कर पा रही है।
| वित्तीय वर्ष | शराब से आय (करोड़ रु.) | लक्ष्य की तुलना |
| 2023-24 | ₹ 8430.5 | लक्ष्य से पीछे |
| 2024-25 | ₹ 8000 | (तय लक्ष्य ₹ 11,000 करोड़ था) |
| 2025-26 | ₹ 12,500 | (बढ़ाया गया नया लक्ष्य) |
राजस्व का लक्ष्य पूरा करने के लिए ही सरकार शराब नीति में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
अवैध शराब की बिक्री और सरकारी सिस्टम में गड़बड़ी
सरकार की सबसे बड़ी चुनौती अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाना है, जो ठेका पद्धति पर लौटने का एक मुख्य कारण हो सकता है।
- अवैध आपूर्ति: छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा अवैध शराब पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से आती है।
- सरकारी सिस्टम की खामियां: सरकारी बिक्री में हमेशा गबन और लोकल ब्रांड की शराब बेचने का दबाव जैसी गड़बड़ियों की संभावना रहती है। सरकारी कार्पोरेशन के जरिए शराब बेचने से सरकार की बदनामी भी हुई है।
पिछली सरकार में हुआ शराब घोटाला
पिछली भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में ढाई हजार करोड़ का शराब घोटाला हुआ था। इस घोटाले का एक प्रमुख कारण शराब का पूरा नियंत्रण मार्केटिंग कार्पोरेशन के हवाले होना माना गया।
इस घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र चैतन्य बघेल, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, कारोबारी अनबर ढेबर समेत कई अधिकारी जेल में हैं। घोटाले में शामिल होने के आरोप में 22 अधिकारियों को सस्पेंड भी किया जा चुका है। कार्पोरेशन के अधिकारी एपी त्रिपाठी भी घोटाले को अंजाम देने में शामिल रहे हैं।



