
छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे नवागढ़ ब्लॉक के बीईओ महेंद्र धर दीवान पर राज्य सरकार ने कड़ा प्रहार किया है। शिक्षा विभाग ने उन्हें पद से हटाते हुए उनकी जगह डोंगरी के स्वामी आत्मानंद स्कूल के प्राचार्य अशोक कुमार पाटले को नवागढ़ का नया बीईओ नियुक्त किया है। दागी अधिकारी को महत्वपूर्ण पद पर बैठाने के फैसले से विभाग की काफी किरकिरी हो रही थी जिसके बाद शासन ने यह सुधारात्मक कदम उठाया है।
पुराना है फर्जीवाड़े का खेल: अफसरों के नकली दस्तखत कर लुटाए सरकारी पैसे
महेंद्र धर दीवान पर लगे आरोपों की जड़ें साल 2016 तक जाती हैं जब वे राजीव गांधी शिक्षा मिशन में समन्वयक थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर तत्कालीन कलेक्टर और सीईओ के हस्ताक्षर स्कैन कर नोटशीट में लगाए थे। इस जालसाजी के जरिए एक ठेकेदार को 2 करोड़ 30 लाख रुपये का फर्जी भुगतान किया गया था। इस मामले में कोतवाली थाने में धोखाधड़ी और गबन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है जिसमें फिलहाल वे गिरफ्तारी से स्टे पर चल रहे हैं।
विवादों से पुराना नाता: युक्तियुक्तकरण में धांधली पर पहले भी हुए थे सस्पेंड
महेंद्र धर दीवान का ट्रैक रिकॉर्ड काफी विवादित रहा है। जून 2025 में बम्हनीडीह बीईओ के पद पर रहते हुए संभाग आयुक्त ने उन्हें निलंबित कर दिया था। उन पर शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (Transfer and Posting) की प्रक्रिया में जमकर धांधली करने के आरोप लगे थे। हालांकि महज दो महीने बाद ही अगस्त 2025 में उनकी बहाली हो गई और उन्हें पामगढ़ के कोसीर स्कूल में प्राचार्य बनाया गया लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा।
डीईओ की भूमिका संदिग्ध: अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर की थी पोस्टिंग
इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अशोक सिन्हा की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। नियम के मुताबिक बीईओ की नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार के पास होता है लेकिन डीईओ ने कथित तौर पर अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हुए एक दागी अधिकारी को बीईओ पद पर बिठा दिया। इसके अलावा डीईओ पर पदोन्नति में गड़बड़ी करने और शासन के आदेशों के खिलाफ जाकर शिक्षकों को अटैचमेंट देने की भी कई शिकायतें ऊपर तक पहुंची हैं।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: शासन ने सुधारी डीईओ की गलती
दागी अधिकारी को बीईओ बनाने के फैसले का चारों तरफ विरोध हो रहा था और इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा था। राज्य सरकार ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए डीईओ के आदेश को दरकिनार किया और महेंद्र धर दीवान को पद से हटाकर संदेश दिया कि दागी चेहरों को प्रशासनिक पदों पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब विभाग डीईओ द्वारा किए गए अन्य विवादास्पद फैसलों की भी आंतरिक जांच करने की तैयारी में है।



