हनुमान मंदिर के गुंबद को अपने सीने से लगा वानर ने त्याग दिए अपने प्राण, देखने लगी लोगों की भीड़

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के पथर्रा शहर के वार्ड 14 स्थित हनुमान मंदिर में एक बेहद आश्चर्यजनक और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। दोपहर लगभग 12 बजे लोगों का ध्यान उस समय गया, जब उन्होंने देखा कि एक वानर (बंदर) मंदिर के गुंबद पर लिपटा हुआ है और उसके प्राण निकल चुके हैं। शहर में पहली बार हुई इस घटना को देखकर हर कोई हैरान रह गया, और मृत वानर को देखने के लिए मंदिर के पास लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

श्रद्धा भाव देख लोगों की आँखें हुईं नम

यह दृश्य देखकर हनुमान जी के दर्शनार्थियों और आस-पास के लोगों की आँखें नम हो गईं। मंदिर के गुंबद पर वानर का इस तरह अंतिम श्वास लेना लोगों के लिए आश्चर्य और भक्ति दोनों का विषय बन गया। उपस्थित लोगों ने तुरंत वानर राज का जयकारा लगाना शुरू कर दिया। लोगों ने कहा कि इस वानर ने अपना प्राण हनुमान मंदिर के गुंबद पर त्यागे हैं, जिससे हनुमान जी के प्रति उसका अनन्य अनुराग प्रदर्शित होता है।

पार्षद समेत बड़ी संख्या में लोग हुए एकत्रित

जैसे ही यह अनोखी घटना पूरे वार्ड में फैली, वार्ड के पार्षद कुलेश्वर साहू और नगर पंचायत के पार्षद तुषार कदम भी मौके पर पहुँच गए। देखते ही देखते सुनील यादव, टीकम पाल, लखन पाल, राजू ध्रुव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए। इस दौरान लोगों में यह चर्चा रही कि श्रद्धा भाव केवल इंसान में ही नहीं, बल्कि मूक जानवरों में भी देखने को मिलती है।

विधि-विधान से किया गया वानर का अंतिम संस्कार

एकत्रित लोगों ने मिलकर गुंबद से लिपटे मृत वानर को नीचे उतारा। इसके बाद, सभी ने मिलकर यह तय किया कि इस वानर का अंतिम संस्कार विधि-विधान के साथ किया जाएगा। सभी उपस्थित लोगों ने धार्मिक भावना के साथ मिलकर वानर के अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया को संपन्न कराया। इस घटना ने पूरे शहर में चर्चा का विषय पैदा कर दिया है।

लोगों ने कहा: मूक जानवर का अनूठा अनुराग

इस अनोखी घटना के साक्षी बने लोगों ने कहा कि यह दृश्य दर्शाता है कि श्रद्धा और भक्ति की कोई सीमा नहीं होती। वानर का अपने आराध्य देव हनुमान जी के स्थान यानी मंदिर के गुंबद से लिपटकर प्राण त्यागना, हनुमान जी के प्रति उसके अटूट अनुराग का एक अनूठा उदाहरण है। यह घटना शहर के लोगों के दिलों में एक गहरी धार्मिक भावना छोड़ गई है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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