
Durg News: दुर्ग जिले के नगपुरा में चल रही पं. प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में उस वक्त हड़कंप मच गया जब टेंट संचालक ने अचानक पंडाल उखाड़ना शुरू कर दिया। आयोजन समिति और कर्मा टेंट हाउस के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर भारी विवाद हो गया। टेंट संचालक नरेंद्र कुमार साहू का दावा है कि उनके साथ 1.15 करोड़ रुपये में काम तय हुआ था, लेकिन समिति ने अब तक केवल 25-30 लाख रुपये ही दिए हैं। बकाया राशि न मिलने से नाराज संचालक ने शनिवार सुबह डोम के हिस्से को खोलना शुरू कर दिया, जिससे वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं के बीच डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पुलिस का सख्त रुख: कथा के बीच टेंट हटाया तो होगी कार्रवाई
Pt. Pradeep Mishra: मामले की संवेदनशीलता और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस विभाग तुरंत एक्शन मोड में आ गया। एएसपी पद्मश्री तंवर और हेम प्रकाश नायक ने मौके पर पहुंचकर टेंट संचालक को सख्त हिदायत दी कि कथा के दौरान टेंट का एक भी हिस्सा नहीं हटाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पंडाल उखाड़ने से भगदड़ जैसे हालात बन सकते हैं, जिससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है। पुलिस ने दोनों पक्षों को बैठाकर समझाइश दी और स्पष्ट किया कि वित्तीय विवाद को कथा खत्म होने के बाद सुलझाया जाए, फिलहाल श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।

टेंट संचालक का पक्ष: ट्रांसपोर्ट का खर्च भी नहीं निकल रहा
टेंट संचालक नरेंद्र साहू ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि समिति की ओर से रोजाना केवल 2 से 3 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जो कि इतने बड़े तामझाम के हिसाब से बहुत कम है। उन्होंने बताया कि भुगतान न मिलने के कारण मजदूरों और ट्रांसपोर्ट का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया है। इसी वजह से उन्होंने पंडाल का आकार भी करीब 15 प्रतिशत तक छोटा कर दिया है। हालांकि, दोपहर में हुई लंबी बातचीत के बाद टेंट संचालक ने काम जारी रखने पर सहमति जताई है और समिति ने शाम तक बाकी रकम देने का वादा किया है।

समिति का दावा: मामूली बात है, कथा में नहीं आएगी कोई बाधा
दूसरी ओर, आयोजन समिति की सदस्य प्रिया साहू और पूर्व सरपंच भूपेंद्र रिगरी ने इस पूरे विवाद को सामान्य बताया है। समिति का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजनों में छोटी-मोटी खींचतान होती रहती है और भुगतान की प्रक्रिया जारी है। उनका तर्क है कि पंडाल हटाने जैसी कोई बात नहीं थी और इसे बेवजह तूल दिया गया। फिलहाल कथा अपने निर्धारित समय पर चल रही है और समिति का दावा है कि 21 दिसंबर तक चलने वाले इस आयोजन में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।



