छत्तीसगढ़ में कलेजा चीर देने वाली घटना: इकलौते बेटे की मौt का गम नहीं झेल सके मां-बाप, साथ में लगा ली फांसी

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है। धरदेई गांव में रहने वाले एक दंपती ने अपने जवान बेटे की मौत के सदमे में आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सोमवार की सुबह जब ग्रामीणों ने गांव के पास ही एक पेड़ से दोनों के शवों को लटके देखा, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतकों की पहचान 48 वर्षीय कृष्णा पटेल और उनकी पत्नी 47 वर्षीय रमाबाई पटेल के रूप में हुई है। इस दुखद अंत ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।

हादसे ने छीन ली थी घर की रोशनी: इकलौते सहारे के जाने से टूटे माता-पिता

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ही इस दंपती के इकलौते बेटे की एक सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी। बुढ़ापे की लाठी और घर के इकलौते चिराग के बुझ जाने से कृष्णा और रमाबाई पूरी तरह टूट चुके थे। पड़ोसियों के मुताबिक, बेटे के अंतिम संस्कार के बाद से ही दोनों ने बातचीत करना बंद कर दिया था और गुमसुम रहने लगे थे। बेटे के बिना उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा था और इसी मानसिक आघात ने उन्हें यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

सुबह का खौफनाक नजारा: पेड़ से लटके मिले पति-पत्नी के शव

सोमवार की अल सुबह जब ग्रामीण अपने दैनिक कार्यों के लिए निकले, तब उनकी नजर घर के पास वाले पेड़ पर पड़ी। वहां दोनों पति-पत्नी फंदे से लटके हुए थे। सूचना मिलते ही शिवरीनारायण पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शवों को नीचे उतारकर पंचनामा तैयार किया। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती जांच में मामला गहरे मानसिक तनाव और पुत्र वियोग का ही लग रहा है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। मौके पर पहुंची टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं और पड़ोसियों से भी पूछताछ की गई है। हालांकि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बेटे की मौत के बाद परिवार पर कोई और मानसिक या आर्थिक दबाव भी था।

मानसिक आघात और सामाजिक चिंता: अपनों को खोने का दर्द बना जानलेवा

इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी बड़े हादसे के बाद प्रभावित परिवार की मानसिक काउंसलिंग कितनी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक हुए बड़े नुकसान के बाद इंसान का हौसला जवाब दे जाता है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस दंपती को ढांढस बंधाया जाता या उन्हें अकेलेपन से बाहर निकाला जाता, तो शायद आज ये दोनों जीवित होते। पुलिस अब परिजनों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज कर रही है ताकि इस दुखद घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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