
छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों और बड़े नेताओं द्वारा बिजली बिल न भरने से राज्य की बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) भारी संकट में फंस गई है। वर्तमान में कंपनी को लगभग 4550 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। इस भारी भरकम नुकसान की सबसे बड़ी वजह सरकारी विभागों पर बकाया 2500 करोड़ रुपये का बिल है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने भी कंपनी को मिलने वाली 5500 करोड़ रुपये की सब्सिडी रोक रखी है। अगर विभागों और सरकार का यह कुल 8000 करोड़ रुपया समय पर मिल जाए तो घाटे में चल रही कंपनी बड़ी आसानी से मुनाफे में आ सकती है।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बंगलों का भी बिल बाकी, 5 हजार रसूखदारों पर एक अरब की उधारी
VIPs. प्रदेश के सबसे ताकतवर लोगों के सरकारी आवासों का बिजली बिल भी समय पर जमा नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री निवास से लेकर उपमुख्यमंत्री और कई मंत्रियों के बंगलों का भुगतान बकाया है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 5767 रसूखदार लोगों पर एक अरब रुपये से अधिक की बिजली उधारी है। हालांकि मंत्रियों के बंगलों का बिल लोक निर्माण विभाग को भरना होता है लेकिन एक सरकारी विभाग द्वारा दूसरे विभाग को पैसा न देने का सीधा असर कंपनी की आर्थिक सेहत पर पड़ रहा है।
रसूखदारों की मलाई और जनता पर महंगाई: बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी
जब बड़े लोग और सरकारी महकमे अपना बिल नहीं चुकाते तो कंपनी अपने नुकसान की भरपाई आम आदमी की जेब से करती है। 11 जुलाई 2025 को विद्युत नियामक आयोग ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी कर दी थी। अधिकारियों ने इस वृद्धि के पीछे बिजली कंपनी की खराब वसूली और घाटे का तर्क दिया था। हकीकत यह है कि यदि बिल्डर, बड़े कारोबारी और सरकारी दफ्तर अपना बकाया चुकता कर दें तो आम जनता पर टैरिफ बढ़ोतरी का यह अतिरिक्त बोझ डालने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे घरेलू उपभोक्ता
छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन के पर्याप्त साधन होने के बावजूद वितरण कंपनी का घाटे में रहना प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है। आम आदमी का बिल थोड़ा भी बकाया होने पर विभाग तुरंत बिजली काट देता है लेकिन रसूखदारों और सरकारी दफ्तरों पर करोड़ों की उधारी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। अगर शासन का एक अंग दूसरे अंग के प्रति अपनी वित्तीय जिम्मेदारी निभाए तो उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि बड़े लोगों की लापरवाही की कीमत प्रदेश का एक साधारण परिवार अपनी गाढ़ी कमाई से चुका रहा है।
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