
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही ने जच्चा और बच्चा दोनों की जान खतरे में डाल दी। गर्भवती महिला को एक नामी निजी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां डॉक्टर ने बच्चे को गर्भ में मृत घोषित कर दिया और रायपुर रेफर कर दिया। लेकिन जब परिजनों ने महिला को शहर के ही एक दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया, तो वहां सीजेरियन डिलीवरी में एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ।
उल्टा बच्चा, डॉक्टर ने कहा- मृत है, ले जाओ रायपुर
Dhamtari News: चारामा ब्लॉक के ग्राम शौरीगांव निवासी भोजराम सिन्हा की बेटी भारती सिन्हा, जो अपनी ससुराल ग्राम सिरसिदा में रहती है, गुरुवार को प्रसव पीड़ा के चलते चारामा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। जांच में पता चला कि बच्चा उल्टा है और मामला क्रिटिकल है, इसलिए महिला को धमतरी रिफर कर दिया गया।
शाम को भारती को धमतरी के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने सोनोग्राफी के बाद दावा किया कि बच्चे की धड़कन बंद हो चुकी है, यानी बच्चा गर्भ में ही मर चुका है। साथ ही डिलीवरी प्रक्रिया के दौरान बच्चे का पैर बाहर निकल चुका था, लेकिन डॉक्टर ने महिला को रायपुर रेफर कर दिया।
परिवार ने लिया बड़ा फैसला, बदली अस्पताल… और मिल गया ज़िंदगी का तोहफा
डॉक्टर की बात सुनकर परिवार घबरा गया, लेकिन वक्त पर सही निर्णय लिया। उन्होंने रायपुर ले जाने की बजाय महिला को तुरंत धमतरी के ही एक दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने बिना देर किए सीजेरियन डिलीवरी की, और भारती ने एक पूरी तरह से स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। फिलहाल मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और परिवार डॉक्टर की लापरवाही पर गुस्से में है।
“अगर रायपुर जाते, तो शायद बच्चा बचता नहीं” – परिजन
परिजनों का कहना है कि अगर वे रायपुर की तरफ निकलते, तो रास्ते में ही जच्चा और बच्चा दोनों की जान को खतरा हो सकता था। ऐसे मामलों में तत्काल निर्णय और उचित इलाज ही जीवन बचा सकता है।
सवाल बड़ा है – क्या अब भी ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई होगी?
इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल ये है कि ऐसे गंभीर मामलों में अगर डॉक्टर बिना जांचे-परखे रेफर कर दें, तो क्या यह लापरवाही नहीं है?
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और लापरवाही बरतने वाले अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।



