
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों और आम जनता को पंजीयन विभाग ने दिवाली से पहले बड़ी राहत दी है। पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर अब जमीनों की रजिस्ट्री के दौरान ऋण पुस्तिका (किसान किताब) की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। पंजीयन विभाग के आईजी पुष्पेंद्र मीणा ने इस संबंध में तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिया है। ऋण पुस्तिका न होने के कारण लोगों को पहले अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही थी, यहाँ तक कि मुंगेली में इसी वजह से एक किसान द्वारा आत्महत्या करने की दुखद घटना भी सामने आई थी। पड़ोसी राज्यों मध्यप्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा समेत देश के अधिकांश राज्यों में यह पुरानी व्यवस्था पहले ही खत्म हो चुकी है, जिसके बाद छत्तीसगढ़ में भी यह बदलाव आया है।
ऋण पुस्तिका खत्म करने के पीछे का कारण
पंजीयन विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि कृषि भूमि के राजस्व अभिलेख ऑनलाइन हो जाने के कारण भौतिक ऋण पुस्तिका की अब कोई विशेष प्रासंगिकता नहीं रह गई है। ऋण पुस्तिका में दिए गए ऋण या बंधक का रिकॉर्ड अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज किया जाता है। इसके अलावा, गिरदावरी संबंधी रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट हो जाते हैं, जो भौतिक ऋण पुस्तिका में अक्सर अद्यतन नहीं हो पाते। पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्री के समय ऑनलाइन प्रविष्टियों से डाटा का मिलान करते हैं। विभाग ने माना कि भौतिक ऋण पुस्तिका की कमी के चलते किसानों को जमीन खरीदी-बिक्री के बाद नई पुस्तिकाएँ समय पर नहीं मिल पाती थीं, जिससे अनावश्यक परेशानी होती थी।

ऑनलाइन डेटा से होगा सत्यापन और पेपरलेस प्रक्रिया
प्रदेश में ऑनलाइन पंजीयन वर्ष 2017 से किया जा रहा है और भुइयां पोर्टल के माध्यम से किसानों को नक्शा, खसरा और बी-1 की प्रति भी ऑनलाइन प्राप्त हो रही है, जो मान्य है। विक्रेता के स्वामित्व के सत्यापन के लिए पंजीयन सॉफ्टवेयर को भुइयां के साथ एकीकृत (Integrated) किया गया है, जिससे पंजीयन के समय राजस्व विभाग के ऑनलाइन डाटा से मिलान होने पर ही आगे की कार्रवाई की जाती है। साथ ही, राजस्व विभाग के सॉफ्टवेयर में ऑटो म्यूटेशन का प्रावधान है, जिसके तहत पंजीयन होते ही स्वतः खसरे का बटांकन होकर नवीन बी-1 जनरेट हो जाता है। इन सभी ऑनलाइन व्यवस्थाओं के कारण अब भौतिक ऋण पुस्तिका या किसान किताब की पंजीयन हेतु आवश्यकता नहीं है। इसलिए पंजीयन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दस्तावेजों के पंजीयन के लिए किसानों या पक्षकारों से ऋण पुस्तिका की माँग न करें, बल्कि स्वामित्व और फसल विवरण जैसे सभी प्रासंगिक तथ्यों की पुष्टि ऑनलाइन डाटा से अनिवार्य रूप से करें।
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