मेकाहारा मर्डर केस: युवक को चोर समझकर पीट-पीटकर मार डाला, अस्पताल के 5 गार्डों को उम्रकैद

रायपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (मेकाहारा) में तीन साल पहले हुई एक बेगुनाह की हत्या के मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पंकज सिन्हा की अदालत ने युवक रोहित कुमार कुशवाहा की बेरहमी से हत्या करने के जुर्म में अस्पताल के पांच सुरक्षाकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सुरक्षा के नाम पर तैनात इन गार्डों ने कानून को अपने हाथ में लेकर एक बेबस युवक को मौत के घाट उतार दिया था। अब कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि रक्षक अगर भक्षक बनेंगे, तो उन्हें कानून का सबसे कठोर सामना करना होगा।

अस्पताल के पास फिजियोथेरेपी कॉलेज में हुई थी दरिंदगी

मामला साल 2023 की एक काली रात का है। मौदहापारा थाना क्षेत्र स्थित आंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) के फिजियोथेरेपी कॉलेज के पास रोहित कुमार कुशवाहा नाम का युवक घूम रहा था। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसे संदिग्ध मानकर पकड़ लिया। अतिरिक्त लोक अभियोजक पूजा मोहिते के अनुसार, आरोपी सुभाषचंद्र यादव, भूपेंद्र मिश्रा, त्रिलोकी साहू, जयनारायण सिंह और योगेंद्र मिश्रा ने रोहित को चोर समझ लिया और बिना किसी पूछताछ के उस पर टूट पड़े।

रस्सी से बांधा और अधमरा होने तक बरसाईं लाठियां

कोर्ट में पेश की गई केस डायरी के अनुसार, गार्डों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं। रोहित खुद को बेगुनाह बताता रहा और जान बख्शने की भीख मांगता रहा, लेकिन गार्डों का दिल नहीं पसीजा। उन्होंने रोहित को रस्सी से बांध दिया और फिर डंडों व लातों से इतनी बेरहमी से पीटा कि उसके शरीर के महत्वपूर्ण अंदरूनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया। जब रोहित मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया, तब डर के मारे गार्डों ने उसे उसी अस्पताल में भर्ती कराया, जिसकी वह सुरक्षा कर रहे थे। वहां इलाज के दौरान रोहित ने दम तोड़ दिया।

काम की तलाश में आया था रायपुर, नसीब हुई मौत

मृतक रोहित के परिजनों ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह रोजगार की तलाश में रायपुर आया था। कई दिनों से काम नहीं मिलने के कारण वह भूखा-प्यासा शहर में भटक रहा था। वह कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक बेरोजगार युवक था जिसकी आंखों में अपने परिवार के लिए कुछ करने का सपना था। लेकिन गार्डों के ‘शक’ और उनकी हैवानियत ने उस सपने को हमेशा के लिए मिट्टी में मिला दिया। रोहित की जेब खाली थी, लेकिन उसका संघर्ष बड़ा था, जिसे लाठियों ने शांत कर दिया।

CCTV फुटेज ने बेनकाब किए रक्षकों के चेहरे

रोहित की मौत के बाद आरोपियों ने खुद पुलिस को सूचना देकर मामला दबाने की कोशिश की, लेकिन कानून के हाथ लंबे थे। पुलिस ने अस्पताल और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें गार्डों की हैवानियत साफ कैद हो गई थी। इसी फुटेज और चश्मदीदों की गवाही के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के रहने वाले इन पांचों गार्डों को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में यह पुख्ता साक्ष्य ही इन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाने में सबसे मददगार साबित हुए।

अदालत का कड़ा संदेश: “कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं”

विशेष न्यायाधीश पंकज सिन्हा की कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें ताउम्र कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने फैसले से समाज को यह संदेश दिया है कि संदेह के आधार पर किसी की जान लेना जघन्य अपराध है। सुरक्षाकर्मियों का काम सुरक्षा करना है, न कि न्यायाधीश बनकर सजा देना। इस फैसले के बाद मेकाहारा अस्पताल के सुरक्षा प्रबंधन पर भी सवाल उठे हैं कि आखिर किस आधार पर ऐसे हिंसक प्रवृत्ति के लोगों को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

बेरोजगारों के संघर्ष और ‘मॉब लिंचिंग’ जैसी मानसिकता

रोहित की मौत केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता पर प्रहार है जहां लोग भीड़ का हिस्सा बनकर या वर्दी के नशे में किसी की भी जान लेने को तैयार हो जाते हैं। एक गरीब युवक जो काम की तलाश में भटक रहा था, वह आज केवल एक फाइल बनकर रह गया। हालांकि, अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को कुछ हद तक मानसिक सुकून जरूर मिला है, लेकिन रोहित की कमी अब कभी पूरी नहीं हो सकेगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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