
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार का दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। धमतरी और कांकेर जिलों में फल-फूल रहे अवैध प्लाटिंग और कॉलोनाइजरों के रसूख का मुद्दा सदन में इस कदर गूंजा कि पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा जब विपक्षी सदस्यों और अपनी ही पार्टी के विधायक अजय चंद्राकर के सवालों का ठोस जवाब नहीं दे पाए, तो माहौल और भी गरमा गया। नाराज विपक्ष ने सरकार पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सदन से दो बार बर्हिगमन कर दिया।
धमतरी-कांकेर में अवैध प्लाटिंग का ‘मकड़जाल’
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधायक अंबिका मरकाम ने धमतरी और कांकेर में अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि पिछले दो सालों में अवैध प्लाटिंग की कितनी शिकायतें मिलीं और कितने खसरों की जांच पूरी हुई? मंत्री टंकराम वर्मा ने लिखित जवाब में बताया कि धमतरी में 3 और कांकेर में 5 शिकायतें मिली हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि कांकेर में मामला 175 खसरों से जुड़ा है, जिनमें से 167 खसरों की जांच अब भी फाइलों में दबी हुई है। विपक्ष ने इसे जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करार दिया।
अजय चंद्राकर ने किया सवाल: ” कब तक होगी कार्रवाई?”
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने अपनी ही सरकार के मंत्री को घेरते हुए पूछा कि अवैध प्लाटिंग करने वालों पर अब तक क्या वास्तविक कार्रवाई हुई? उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह खेल पिछले 3-4 सालों से चल रहा है, तो विभाग ‘नियमानुसार कार्रवाई’ का राग क्यों अलाप रहा है? चंद्राकर ने पूछा, “क्या मंत्री जी यह बताने की स्थिति में हैं कि आखिर कब तक दोषियों पर कार्रवाई करेगी? क्या इसकी कोई समय सीमा है?” उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग खुद ही इस अवैध धंधे को बढ़ावा दे रहा है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल के ‘चुभते’ सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्व मंत्री के सामने सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने पूछा कि जब 5 डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री पर रोक है, तो खसरों का इतना बड़ा बंदरबांट कैसे हो गया? बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि पटवारी का इंक्रीमेंट रोकना या छोटे कर्मचारियों को नोटिस देना केवल दिखावा है। उन्होंने पूछा कि असली जिम्मेदार बड़े अधिकारियों और कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई करने से सरकार क्यों कतरा रही है? उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा सिंडिकेट है, जिसे ऊपर से संरक्षण मिल रहा है।
मंत्री की ‘चूक’ और सदन में भारी हंगामा
बहस के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब मंत्री टंकराम वर्मा सवालों में उलझ गए। धमतरी के सवाल पर जब मंत्री ने कांकेर का आंकड़ा पढ़ना शुरू किया, तो भूपेश बघेल ने उन्हें टोकते हुए कहा, “हम धमतरी का पूछ रहे हैं और आप कांकेर का जवाब दे रहे हैं।” इस चूक ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया। बघेल ने पूछा कि मामला दो साल से लंबित है, क्या आप विधानसभा की विशेष समिति से इसकी जांच कराएंगे? जब मंत्री ने कहा कि विभाग सक्षम है, तो विपक्ष ने इसे ‘लीपापोती’ बताते हुए वॉकआउट कर दिया।
अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को सजा क्यों?
अजय चंद्राकर ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विभाग ने अपनी रिपोर्ट में धमतरी की कार्रवाई को ‘निरंक’ बताया है, जबकि कांकेर में पटवारियों पर कार्रवाई की गई है। चंद्राकर ने सवाल किया कि जिन कर्मचारियों ने विभाग के आदेश का पालन करते हुए अवैध प्लाटिंग के खिलाफ खुद संज्ञान लेकर काम किया, उन्हें सजा क्यों दी जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को ही आरोपी बना दिया है, जबकि असली माफिया खुलेआम घूम रहे हैं।
एसआईआर (SIR) के नाम पर उलझा मामला
विधायक अजय चंद्राकर ने मंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा कि अवैध प्लाटिंग के मामलों में ‘एसआईआर’ (विशेष जांच) कब से कब तक चली? उन्होंने पूछा कि जब अवैध कब्जा सालों पुराना है, तो जांच की आड़ में अब तक कार्रवाई को क्यों लटकाया गया? चंद्राकर ने बार-बार जोर दिया कि मंत्री जी यह साफ करें कि विभाग ने उन रसूखदारों के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं जिन्होंने बिना अनुमति के खेतों को कॉलोनियों में तब्दील कर दिया।
मंत्री का स्पष्टीकरण: “कांकेर और धमतरी के मामले अलग”
चौतरफा हमलों के बीच राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि चूंकि प्रश्न मिश्रित था, इसलिए आंकड़ों में भ्रम की स्थिति बनी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई का मामला केवल कांकेर जिले से संबंधित है और धमतरी में फिलहाल ऐसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि, मंत्री के इस जवाब ने आग में घी डालने का काम किया, क्योंकि विपक्ष इसे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश मान रहा था।
संरक्षण का आरोप और विपक्ष का बर्हिगमन
विपक्ष ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि राजस्व विभाग और भू-माफियाओं के बीच गहरी सांठगांठ है। भूपेश बघेल ने कहा कि अवैध कॉलोनाइजर्स को बढ़ावा देने का काम सीधे मंत्रालय से हो रहा है। मंत्री के जवाबों से असंतुष्ट होकर और इसे भू-माफियाओं को दिया जाने वाला ‘सरकारी संरक्षण’ बताते हुए पूरी कांग्रेस पार्टी ने सदन का बहिष्कार कर दिया। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि अवैध प्लाटिंग का मुद्दा आने वाले दिनों में और भी बड़े सियासी तूफान का रूप लेगा।



