
रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आज ‘श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ’ का लोकार्पण होने जा रहा है। इस समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल और कुलाधिपति रमेन डेका करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उच्च शिक्षा मंत्री टेकराम वर्मा भी बतौर अतिथि शामिल होंगे। इस शोधपीठ का उद्देश्य महान संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव के विचारों और उनके योगदान पर अनुसंधान को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे अकादमिक प्रगति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
RSS नेता की उपस्थिति पर सियासी रार
इस लोकार्पण समारोह में आरएसएस के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल को मुख्य वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया गया है। उनकी उपस्थिति को लेकर छात्र राजनीति और गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। जहां एक ओर प्रशासन इसे एक विद्वान के व्याख्यान के तौर पर देख रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठन एनएसयूआई ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थान का इस्तेमाल एक विशेष विचारधारा को थोपने के लिए किया जा रहा है।

एनएसयूआई ने दी काले झंडे दिखाने की चेतावनी
छात्र संगठन एनएसयूआई ने घोषणा की है कि वे इस कार्यक्रम का विरोध करेंगे और मुख्य वक्ता को काले झंडे दिखाएंगे। संगठन के नेता पूनेश्वर लहरे का कहना है कि शिक्षण संस्थानों को किसी एक वैचारिक संगठन का अड्डा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि शैक्षणिक मंचों पर राजनीतिक संगठनों के प्रचारकों को बुलाना शिक्षा की निष्पक्षता और स्वतंत्रता के खिलाफ है। एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि उनका यह विरोध शांतिपूर्ण होगा और इसका मकसद शिक्षा के राजनीतिकरण को रोकना है।

प्रशासन की बढ़ी चिंता और कड़ी सुरक्षा
SECURITY: एनएसयूआई के विरोध प्रदर्शन के ऐलान के बाद पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। समारोह स्थल के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वीआईपी मूवमेंट और संभावित हंगामे को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि लोकार्पण कार्यक्रम में किसी तरह का व्यवधान न आए और यह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। वहीं छात्र नेता भी अपनी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं जिससे परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है।



