छत्तीसगढ़ में घरेलू गैस और ईंधन को लेकर बताई ये जानकारी, क्या खत्म हो गया स्टॉक?: खाद्य सचिव ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, होटलों की गैस में 15% कटौती का फैसला

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल-गैस की आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट मोड पर है। प्रदेश में घरेलू गैस (LPG), पेट्रोल और डीजल की किल्लत की अफवाहों को विराम देने के लिए खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में गैस एजेंसियों और पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ आपूर्ति व्यवस्था का खाका तैयार किया गया। सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में ईंधन का भंडार पर्याप्त है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

डिपो में सुरक्षित है ईंधन का कोटा: अफवाहों पर न दें ध्यान

खाद्य सचिव ने अधिकारियों के साथ समीक्षा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के तीनों प्रमुख डिपो में पेट्रोल और डीजल का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। इन केंद्रों से सभी जिलों में तेल की सप्लाई नियमित रूप से जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सप्लाई चेन में कोई रुकावट नहीं है, इसलिए आम नागरिकों को स्टॉक खत्म होने जैसी अफवाहों से बचना चाहिए। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में वितरण व्यवस्था की हर घंटे निगरानी करें ताकि कहीं भी लंबी कतारें न लगें।

होटलों की गैस में कटौती: घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगी प्राथमिकता

बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाने के लिए कमर्शियल गैस की सप्लाई में करीब 15 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकती है। इसके साथ ही सरकार ने ‘प्रायोरिटी सेक्टर’ तय कर दिया है। अब अस्पतालों, स्कूलों और छात्रावासों (हॉस्टल्स) को रसोई गैस की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम आदमी के किचन का बजट और जरूरी सेवाएं किसी भी हाल में प्रभावित न हों।

कालाबाजारी करने वालों पर नकेल: अवैध रिफिलिंग पर होगी जेल

ईंधन की संभावित कमी की खबरों के बीच जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों को रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों की औचक जांच करें। यदि कोई भी संचालक सिलेंडर की अवैध रिफिलिंग या तेल की जमाखोरी करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री साय का आश्वासन: “छत्तीसगढ़ में स्टॉक की कोई कमी नहीं”

प्रदेशवासियों में विश्वास जगाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खुद कमान संभाली है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को भरोसा दिलाया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का प्रचुर भंडार उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े लहजे में कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि दूरदराज के इलाकों में भी गैस सिलेंडर की डिलीवरी समय पर हो। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे पैनिक बाइंग (जरूरत से ज्यादा खरीदारी) न करें, क्योंकि इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।

वैश्विक तनाव का साया: केंद्र सरकार ने लागू किया कड़ा कानून

दरअसल, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) से होने वाली सप्लाई बाधित हुई है। इसी रूट से भारत का अधिकांश कच्चा तेल और गैस आती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ के प्रावधानों को सक्रिय कर दिया है। इसका मकसद पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करना है। छत्तीसगढ़ सरकार केंद्र के इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए प्रदेश में सप्लाई चेन को सुचारू बनाने में जुटी है।

शिकायतों के लिए हेल्पलाइन: टोल फ्री नंबर पर करें संपर्क

अगर आपको गैस सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है या पेट्रोल पंप पर कोई अनियमितता दिखती है, तो आप सीधे सरकार से शिकायत कर सकते हैं। राज्य सरकार ने आम नागरिकों के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके आप गैस एजेंसी की मनमानी या ईंधन की किल्लत से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं। खाद्य विभाग की टीम इन शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेकर तत्काल समाधान करेगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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