
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक से भ्रष्टाचार का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ ग्राम पंचायत कंचीरा में तैनात रोजगार सहायक ललित यादव पर आरोप है कि उसने गरीबों को काम देने वाली मनरेगा योजना में खुद को ही मजदूर बनाकर पेश कर दिया। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हो रहे एक निर्माण कार्य में रोजगार सहायक ने अपनी आधिकारिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। नियमों के मुताबिक, पंचायत के कामकाज की देखरेख करने वाला कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी उसी योजना में बतौर मजदूर काम नहीं कर सकता, लेकिन यहाँ कायदों को ताक पर रखकर खुद की मजदूरी का भुगतान करवा लिया गया।
आंकड़ों में धांधली: 16 दिन की फर्जी हाजिरी लगाकर हड़पे हजारों रुपये
शिकायत में दिए गए दस्तावेजों के अनुसार, रोजगार सहायक ने मस्टर रोल क्रमांक 10236 के जरिए 20 जून से 5 जुलाई 2025 तक की हाजिरी भरी थी। इसमें कुल 16 दिनों की मजदूरी दर्शाते हुए 4176 रुपये की राशि अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर करवा ली। यह पूरी प्रक्रिया तब अपनाई गई जब वह खुद उस पंचायत का प्रशासनिक काम देख रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि जिस काम के लिए गरीब मजदूरों को तरसना पड़ता है, उस पर रसूखदार कर्मचारियों ने सेंध लगा दी है। इस फर्जीवाड़े ने सरकारी सिस्टम की खामियों और अधिकारियों की मॉनिटरिंग पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियमों की धज्जियां: पंचायत राज अधिनियम और मनरेगा गाइडलाइंस का उल्लंघन
नियम साफ कहते हैं कि रोजगार सहायक का काम मनरेगा के तहत मजदूरों का नाम दर्ज करना और मस्टर रोल तैयार करना है, न कि स्वयं मजदूर बनकर सरकारी खजाने से पैसा निकालना। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह न केवल पद का दुरुपयोग है, बल्कि सीधे तौर पर शासकीय राशि के गबन का मामला है। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में इस तरह की सेंधमारी से योजना की साख को बट्टा लगा है। इस मामले में पारदर्शिता की कमी और ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाली मिलीभगत की बू आ रही है।
कलेक्टर से गुहार: उच्चस्तरीय जांच और रोजगार सहायक को बर्खास्त करने की मांग
इस जालसाजी की शिकायत अब रायगढ़ कलेक्टर तक पहुंच गई है। लिखित आवेदन में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और बारीकी से जांच कराई जाए ताकि यह पता चल सके कि इसमें और कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने आरोपी रोजगार सहायक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और सेवा समाप्ति की अपील की है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं। यदि दोषी पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो मनरेगा में भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले और बुलंद होंगे।



