
Dhamtari Corruption Case: धमतरी नगर निगम में टिप्पर वाहनों की खरीदी को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। भाजपा शासित नगर निगम में ही भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लग रहे हैं। जेम पोर्टल के माध्यम से की गई दो टिप्पर वाहनों की खरीदी में लाखों रुपये की अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। भाजपा पार्षदों ने अधिकारियों पर कमीशनखोरी और मनमानी के आरोप लगाए हैं।
जेम पोर्टल पर खरीदी में लाखों का अंतर
नगर निगम ने जेम पोर्टल के माध्यम से दो टिप्पर वाहनों की खरीदी प्रति वाहन 24 लाख 75 हजार रुपये की दर से की है। कुल खरीदी राशि 49 लाख 50 हजार रुपये बताई गई। जबकि एक अन्य फर्म से प्राप्त कोटेशन में टाटा 407 मॉडल के समान वाहनों की कीमत मात्र 26 लाख 32 हजार रुपये बताई गई थी। इस प्रकार दोनों वाहनों की खरीदी में करीब 23 लाख रुपये का अंतर सामने आया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी राशि अधिक क्यों दी गई और किसके निर्देश पर यह सौदा हुआ।

भाजपा पार्षदों ने उठाई पारदर्शिता पर शंका
सदर उत्तर वार्ड के पार्षद नीलेश लूनिया, जो स्वास्थ्य विभाग के सभापति और मेयर इन काउंसिल के सदस्य हैं, ने इस मामले की जानकारी मांगनी चाही, लेकिन अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पार्षद लूनिया ने अपने सहयोगी पार्षदों कुलेश सोनी और ईश्वरलाल सोनकर के साथ मिलकर इस खरीदी की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है और अब तक किसी ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। भाजपा पार्षदों का कहना है कि “महापौर रामू जगदीश रोहरा के न खाऊंगा, न खाने दूंगा” के नारे अब केवल कागजों में रह गए हैं, जबकि हकीकत में अधिकारियों का भ्रष्टाचार जारी है।
ठेकेदार पर कांग्रेस शासनकाल में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
पार्षदों ने आरोप लगाया है कि जिस ठेकेदार पर कांग्रेस शासनकाल में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, वही अब भाजपा शासन में भी निगम के ठेकों में सक्रिय है। भाजपा पार्षदों ने पहले दावा किया था कि सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन अब वही ठेकेदार करोड़ों की सप्लाई कर रहा है। इससे भाजपा पार्षदों में गहरा असंतोष है।
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में भी गुणवत्ता पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में ठेकेदार द्वारा घटिया कार्य किए जाने की शिकायत सत्तापक्ष के पार्षदों ने की थी। इसके बावजूद निगम अधिकारियों ने रातोंरात ठेकेदार को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया। माना जा रहा है कि इस भुगतान के पीछे भारी कमीशनखोरी की भूमिका रही है। इस मामले ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मोटर खरीदी पर भी विवाद, महापौर ने रोका आदेश
निगम में पदस्थ अधिकारियों द्वारा एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 60 एचपी की दो मोटर लगभग 19 लाख रुपये की लागत से खरीदने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन विरोध के बाद महापौर रामू रोहरा ने यह आदेश रोक दिया और केवल एक मोटर 3.70 लाख रुपये में खरीदी गई। इससे शासन को लाखों रुपये की बचत हुई। हालांकि नागरिकों का सवाल है कि “अगर गड़बड़ी स्पष्ट थी तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?”
नागरिकों ने मांगी कलेक्टर से जांच की मांग
धमतरी के जागरूक नागरिकों ने जिले के कलेक्टर अविनाश मिश्रा से मांग की है कि नगर निगम में चल रहे भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध खरीद-फरोख्त की जांच की जाए। उनका कहना है कि जब अधिकारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर मनमानी कर रहे हैं, तब शासन को सख्ती से हस्तक्षेप करना चाहिए। इस पूरे मामले पर निगम आयुक्त प्रिया गोयल से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
धमतरी नगर निगम में टिप्पर खरीदी से शुरू हुआ विवाद अब बड़े भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के सवालों में बदल गया है। भाजपा पार्षदों के असंतोष और नागरिकों की नाराजगी के बीच अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Also Read: 6 साल की बच्ची को चॉकलेट के बहाने बुलाकर की घिनौनी हरकत, आरोपी गिरफ्तार



