
CG Yuktiyuktkaran BEO Suspend: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में शिक्षकों एवं स्कूलों की युक्तियुक्तकरण का बड़ा कदम उठाया है। जिस पर शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण को लेकर सरगुजा संभाग में शैक्षणिक पदस्थापन और समायोजन में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने दो विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) — रामानुजनगर के पंडित भारद्वाज और मनेंद्रगढ़ के सुरेन्द्र प्रसाद जायसवाल — को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
फर्जी रिक्त पद और विषयों की हेराफेरी का मामला
जांच में सामने आया कि रामानुजनगर के बीईओ पंडित भारद्वाज ने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत भुवनेश्वरपुर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अंग्रेजी विषय के दो फर्जी रिक्त पद दर्शाए। जबकि वहां पहले से ही चार व्याख्याता कार्यरत थे। इस आधार पर दो अतिरिक्त व्याख्याताओं की नियुक्ति कर दी गई।

इसके अलावा, प्राथमिक शाला सरईपारा (जगतपुर) और देवनगर में छात्र संख्या के अनुपात से अधिक शिक्षक पद दिखाए गए, जिससे वहां भी अनावश्यक शिक्षकों की पदस्थापना हुई। सुमेरपुर हाई स्कूल में तो कला संकाय के शिक्षक को विज्ञान विषय का बताकर एक अतिरिक्त विज्ञान शिक्षक की तैनाती कराई गई।
वरिष्ठता सूची में हेरफेर, जानबूझकर की गई गड़बड़ियां
मनेंद्रगढ़ के बीईओ सुरेन्द्र प्रसाद जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने समायोजन प्रक्रिया में वरिष्ठता सूची के साथ छेड़छाड़ की। उदाहरण के तौर पर, माध्यमिक शाला लेदरी की वरिष्ठ शिक्षिका (क्रमांक 4393) को अतिशेष घोषित कर दिया गया, जबकि उनसे कनिष्ठ शिक्षिका को पद पर बनाए रखा गया। प्राथमिक शाला चिमटीमार और माध्यमिक शाला साल्ही में भी इसी प्रकार नियमों की अनदेखी और विषय चक्र का उल्लंघन पाया गया।
नियमों का खुला उल्लंघन, निलंबन के आदेश जारी
इन सभी मामलों में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 और (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया। प्रशासन ने इसे कूटरचना और स्वेच्छाचारिता मानते हुए दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबन अवधि में दोनों अधिकारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा। उनका मुख्यालय क्रमशः बलरामपुर-रामानुजगंज और मनेंद्रगढ़ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
इस कार्रवाई को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार-मुक्त संचालन की दिशा में उठाए गए सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे भविष्य में समायोजन व पदस्थापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई जा रही है।



